100 छात्रों के साथ 100 घंटे बिताएं वैज्ञानिक : मोदी

इंफाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वैज्ञानिकों से दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं के 100 छात्रों के साथ 100 घंटे बिताने की अपील की ताकि उनके मन में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाई जा सके।

मोदी ने यहां मणिपुर विश्वविद्यालय में 105वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए कहा कि वैज्ञानिक और सामाजिक जिम्मेदारी समय की आवश्यकता है साथ ही उन्होंने जानना चाहा कि क्या हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे बच्चे भारत में विज्ञान को पर्याप्त रुप से समझ पा रहे हैं।

मोदी ने कहा कि वैज्ञानिकों को प्रति वर्ष दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं के 100 छात्रों के साथ 100 घंटे बिताने चाहिए ताकि उनके मन में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाई जा सके।

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित तीन वैज्ञानिकों समेत देश के विभिन्न हिस्सों तथा विदेशों से आए वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए मोदी ने वैज्ञानिक प्रो. यशपाल, यूआर राव और बलदेव तथा मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा विज्ञान क्षेत्र में उनके कार्यों काे याद किया। उन्होंने हॉकिंग को सबसे चमकदार सितारा बताते हुए कहा कि वह भारत के मित्र थे। उन्होंने हॉकिंग को अबतक का सबसे महान प्रेरक बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इंफाल में दूसरी बार विज्ञान कांग्रेस का आयोजन क्षेत्र में विज्ञान को विकसित करने की भावना का प्रमाण है। उन्होंने वैज्ञानिकों अनुसंधान और विकास और नई चीजाें के आविष्कार पर जोर देने की अपील ताकि जीवन को आसान बनाया जा सके।

उन्होंने कहा कि जैसा कि सुभाष चंद्र बोस ने 1944 में लोगों से आजादी की लड़ाई में भाग लेने का आह्वान किया था, उसी प्रकार वैज्ञानिकों को लोगों के जीवन को सरल बनाने में मदद करने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने बताया कि मौसम विज्ञान के विकास ने पूर्वोत्तर के पांच लाख से अधिक किसानों की सहायता की है।

मोदी ने कहा कि किसानों की मदद करने के लिए और पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए मणिपुर में एक एथनो मेडिकल क्लाइमेट सेंटर खोला जाएगा। उन्होंने कहा कि बांस को अब घास के रूप में माना जाएगा और यह बांस की मुक्त आवाजाही में मदद करेगा और बांस मिशन को भी मजबूती प्रदान करेगा जिसके लिए 1200 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय से जेसी बोस, सीवी रमन, मेघनाद साहा और एसएन बोस के बताए मार्ग को अपनाने और सामाजिक-आर्थिक समाधान ढ़ूंढने में मदद करने की भी अपील की।

उन्होंने कहा कि हमें राज गोपालन जैसे वैज्ञानिकों के कार्यों को अहमियत देनी चाहिए, जिन्होंने मदुरै में सड़क बनाने के लिए प्लास्टिक उपयोग करने का अनोखा तरीका इजाद किया। उन्होंने सरकार को मुफ्त में अपनी प्रौद्योगिकी दे दी जिसके इस्तेमाल से 11 राज्यों में 5000 किलोमीटर की सड़कों का निर्माण किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक कचरे का उपयोग करने के साधन भी विकसित कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए हमें गैर-जीवाश्म ईंधन का उपयोग करना शुरू करना होगा और सरकार 2030 तक बिजली के मिश्रण में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता का हिस्सा बढ़ाकर 40 प्रतिशत से अधिक करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत सौर प्रौद्योगिकी में अग्रणी है।

उन्होंने कहा कि वैदिक विज्ञान के उपयोग से, वैज्ञानिकों को लेजर, प्रकाश और कंप्यूटर पर शोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिभा पलायन रोकने के लिए सरकार ने पीएम रिसर्च फेलो शुरू किया है और इसलिए यूयूएससी, आईआईटी, एनआईटी, आईआईएसआई और आईआईआईटी के छात्रों को आईआईटी और आईआईएससी में पीएचडी के लिए सीधे सीटें मिल सकती हैं।

मोदी ने कहा कि वैज्ञानिकों को सिकल सेल एनीमिया को नियंत्रित करने, कुपोषण की जांच तथा आवास की समस्याओं का समाधान करने के लिए निदान खाेजने की कोशिश करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नदियों को साफ करने और सौर ऊर्जा का कुशल उपयोग करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण का बेहतर इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

मोदी ने वैज्ञानिकों से योग का इस्तेमाल करने का आह्वान करते हुए कहा कि यह इलाज का एक पारंपरिक रूप और भविष्य के लिए तैयार रहने की अचूक दवा है। उन्होंने कहा कि जैसा कि भारत आजादी के 75वें वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है, ऐसे में वैज्ञानिक समुदाय को भी कनेक्टिविटी में सुधार लाने और लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने का तंत्र विकसित करना चाहिए।

मोदी सुबह साढ़े नौ बजे इंफाल अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर पहुंचे। उनके साथ केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्द्धन, राज्य मंत्री जीतेंद्र सिंह और राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ भी थे। राज्यपाल डा. नजमा हेपतुल्ला, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह, उप मुख्यमंत्री वाई जॉयकुमार सिंह ने मोदी की अगवानी की।