अक्षयवट का वीआइपी दर्शन

प्रयागराज :प्रयागराज अक्षयवट का वीआइपी दर्शन भी हो सकेगा। जो भी वीआइपी पवित्र वट वृक्ष के दर्शन के लिए जाएंगे उनके लिए वही पुराना रास्ता होगा जहां से पहले अक्षयवट पहुंचा जाता था। इस मार्ग पर भी मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है।यह मार्ग अशोक स्तंभ होकर जाता है हालांकि इस मार्ग की दूरी ज्यादा होगी। अक्षयवट दर्शन के बाद ये वीआइपी पातालपुरी और सरस्वती कूप जा सकेंगे। वीआइपी के निकास का रास्ता भी अलग होगा। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, रक्षा मंत्री तथा राज्य अतिथि जैसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों के लिए किले में कार से भी जाने की सुविधा होगी। अलबत्ता वीआइपी के लिए अलग समय निर्धारित किया जाएगा। वीआइपी भी दर्शन दूर से ही कर सकेंगे। वे भी अक्षयवट की परिक्रमा नहीं कर सकेंगे।अक्षयवट को स्टील की रेलिंग से घेरा जा रहा है, जिसके बाद परिक्रमा नहीं हो सकेगी। अक्षयवट के पास केवल पुजारी ही होंगे। महत्वपूर्ण व्यक्तियों के अक्षयवट तक जाने वाले मार्ग पर भी मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है। बीच में स्थित सुरंग की रंगाई-पुताई भी कराई जा रही है। फव्वारे और स्टील के खंभों पर रंग-बिरंगे झंडे भी लगाए जा रहे हैं। एडीएम कुंभ मेला दिलीप कुमार त्रिगुनायत का कहना है। कि राज्य अतिथियों को विशेष दर्शन कराया जाएगा। प्रवासी भारतीयों तथा राष्ट्राध्यक्षों को अक्षयवट का दर्शन कराने के लिए अलग से इंतजाम हो रहे हैं।कुंभ मेला के लिए कराए जा रहे अस्थायी कार्य भी पिछड़ रहे हैं। पांटून पुलों का काम काफी पीछे है। इसके अलावा जल निगम, विद्युत विभाग, स्वास्थ्य व पीडब्ल्यूडी के काम पिछड़ रहे हैं। अस्थायी कार्यो को पूरा करने की डेडलाइन 31 दिसंबर है। इसको लेकर मंगलवार को पूर्वान्ह 11 बजे मंडलायुक्त डॉ.आशीष कुमार गोयल सभी विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की । इसमें कार्यो की प्रगति की समीक्षा की। इसके बाद मंडलायुक्त कार्यो का स्थलीय निरीक्षण भी किया । दूसरी ओर सोमवार को कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने कई अधिकारियों के साथ अरैल क्षेत्र में बनाए जा रहे संस्कृति ग्राम व कला ग्राम के कार्यो का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।[ ब्यूरो रिपोर्ट प्रयागराज]