स्व-सहायता समूहों को स्व-रोजगार गतिविधियों के लिये दिये गये 1910 करोड़

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दमोह @ ग्रामीण निर्धन परिवार की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्म निर्भर बनाने में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी उद्देश्य से ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों में संगठित कर प्रदेश में डेढ़ लाख से अधिक स्व-सहायता समूह बनाए गए। राज्य सरकार ने स्व-सहायता समूहों के गठन के लिए महिला हितग्राहियों की पहचान सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण सूचकांक (SECC) से करने के निर्देश दिए है।

प्रदेश के 43 जिलों के 271 विकासखण्डों में मिशन की गतिविधियाँ संचालित की जा रही है। एक जैसी आर्थिक, सामाजिक और वैचारिक स्थिति वाली महिलाओं को समूह के रूप में संगठित कर रोजगार-मूलक गतिविधियों से जोड़ा गया है। समूहों को तीन माह पश्चात ग्रेडिंग के आधार पर 10 से 15 हजार रूपये का रिवाल्विंग फण्ड दिया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 2 लाख 3 हजार 244 स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 23 लाख 28 हजार ग्रामीण महिला सदस्यों को संगठित किया गया है। एक लाख 51 हजार 438 स्व-सहायता समूहों को स्व-रोजगार गतिविधियों के लिए 1910 करोड़ रूपये का ऋण बैंकों के माध्यम से मुहैया करवाया गया है।