26 जनवरी की परेड में बजेगा शादी-ब्याह का बैंड
मुरैना। मध्यप्रदेश के जिला मुरैना में इस बार 26 जनवरी की परेड में कदम ताल के लिए शादी ब्याह के बैंड बजाए जाएगें । वैसे गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस पर ‘सारे जहां से अच्छा, हिंदोस्तां हमारा’ और ‘कदम-कदम बढ़ाए जा, खुशी के गीत गाए जा’ जैसे गीत हमेशा गाए व सुनाए जाते है। जिसके लिए ऐसे अवसरों पर पुलिस के बैंंड द्वारा कदम ताल के रिर्हसल कराई जाती है। लेकिन इस बार मुरैना पुलिस के पास खुद का बैंड न होने के कारण परेड में कदम ताल के लिए शादी ब्याह में फिल्मी गीत और नागिन धुन बजाने वाले बैंड द्वारा बजाई जाएगी। वहीं मुरैना एसएएफ के बैंड में भी अब सिर्फ एक ही कर्मचारी बचा है। वहीं पुलिस और एसएएफ का बैंड न होने के कारण शादी ब्याह के बैंड को पुलिस ने किराए पर ले लिया है जो परेड़ के लिए रिहर्सल करवा रहा है।
बताया जाता है कि पुलिस और एसएएफ की नियमित परेड में सबसे अहम चीज होती है कदम ताल। जबकि कदम ताल देने के लिए पुलिस और एसएएफ के पास अपने बैंड होते हैं, लेकिन वर्तमान समय में मुरैना पुलिस और एसएएफ में से किसी के पास भी खुद का बैंड नहीं है। पुलिस और एसएएफ के कार्यक्रम के लिए भी अक्सर बैंड किराए से ही लाना पड़ता है। जबकि लंबे समय से पुलिस और एसएएफ में से किसी में भी बैंड मास्टर और बैंड के साज बजाने वालों की नियुक्ति नहीं की गई है।
जानकारी के अनुसार वर्तमान समय में मुरैना में एसएएफ के पास बैंड के नाम पर सिर्फ एक ड्रमिस्ट है, जो कि बड़ा ड्रम बजाता है।कुछ समय पहले एसएएफ और पुलिस के पास बैगपाइपर भी हुआ करते थे। जिनसे निकलने वाली मार्चपास्ट धुन न सिर्फ लोगों का मंत्र मुग्ध करती है, बल्कि परेड में हिस्सा ले रहे दलों में शामिल लोगों में जोश भी भर देती थी।
बाजार से अाए है साज वादक
26 जनवरी यानि गणतंत्र दिवस की परेड के लिए ढोल पर एसएएफ के एक कर्मचारी तैनात हैं। वहीं छोटे ड्रम के अलावा अन्य साजों पर सात साजवादक बाजार से एक निजी बैंड से बुलाए गए हैं। इन बाजार से बुलाए गए साज बजाने वालों को परेड के लिए एक लय ताल में चलना सिखाया की ट्रेनिंग दी जा रही है।
क्योंकि परेड के दरम्यािन इन साज वादकों को भी परेड के पीछे या फिर ग्राउंड के बीच से मंच तक पहुंचना होता है। बैंड का होना इसलिए बहुत जरूरी होता है, क्योंकि बैंड की ताल पर परेड में शामिल हाेने वाली टुकड़ियां एक साथ कदम उठाती हैं। वहीं बैंड के अभाव में परेड न तो अच्छे से होती है और नहीं आकर्षक हो पाती है।
इनकी भर्ती होती है अलग से
पुलिस अधिकारियों की मानें तो पुलिस और एसएएफ के बैंड पहले लगभग हर जगह हुआ करते थे। लेकिन मध्यप्रदेश में जहां-जहां साज वादक रिटायर्ड होते गए उनकी जगह खाली ही रह गईं। इसके बाद अभी तक नई भर्ती भी नही हुईं, और प्रदेश के कुछ जिलो में जो भी भर्ती हुईं वे पर्याप्त संख्या में नहीं थीं। यही कारण है कि प्रदेश भर में पुलिस और एसएएफ के बैंड की हालत अभी तक खस्ता ही है।
इनका कहना है
बैंड बजाने वाला जो हमारे यहां था वह इसी साल रिटायर हो गया है।हालांकि बैंड की समस्या अन्य शहरों में भी है। अभी बाजार से बैंड लिया है। कई जगह तो स्कूलों तक से लेना पडता है। कार्यक्रम तो करना ही है।
विनीत खन्ना
पुलिस अधीक्षक मुरैना