डीबीटी के जरिए आम लोगों के खातों में सीधे भेजे गए 9 लाख करोड़ रुपये

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मोदी सरकार ने किया बिचौलियों को बाहर, डीबीटी से 9 लाख करोड़ रुपये सीधे भेजे आम लोगों के बैंक खातों में

नए साल में भ्रष्टाचार पर प्रहार से जुड़ी बड़ी ख़बर आई है। केंद्र से गरीबों तक पहुंचने वाले पैसे पर कुंडली मारकर बैठे रहनेवाले बिचौलियों को मोदी सरकार ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। जरुरतमंदों को मोदी सरकार ने अबतक नौ लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के जरिए सीधे उनके बैंक खातों में भेजी है। इतना ही नहीं मौजूदा वित्तीय वर्ष के पहले नौ महीनों में ही दो लाख करोड़ रुपए से ज्यादा आम जनता के खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं।

इसी हफ्ते कर्नाटक के तुमकुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीबीटी से पीएम किसान सम्मान निधि की तीसरी किस्त के तौर पर 12000 करोड़ सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजा। इस मौके पर उन्होंने कहा “देश में एक वो दौर भी था जब गरीब के लिए एक रुपए भेजा जाता था तो सिर्फ 15 पैसे पहुंचते थे। बाकी के 85 पैसे बिचौलिए मार जाते थे। आज जितने भेजे जा रहे हैं, उतने, पूरे के पूरे सीधे गरीब के खाते में पहुंच रहे हैं।”

डीबीटी के डैशबोर्ड के मुताबिक साल 2014 से अबतक यानी 3 जनवरी तक 9,08,116 करोड़ रुपए सीधे लोगों के बैंक अकाउंट में आए हैं, जिसमें से 2,04,523 मौजूदा वित्तीय वर्ष यानी पिछले साल मार्च से दिसंबर तक की अवधि में लोगों को मिले हैं।

बिचौलिये खाते थे पैसे, अब सीधे खाते में
फिलहाल 56 मंत्रालयों की 433 योजनाएं डीबीटी के दायरे में है। बिचौलियों के खात्मे और भ्रष्टाचार की लीकेज बंद होने से केंद्र से चला पूरा पैसा ग़रीबों और लाभार्थियों तक पहुंच रहा है। आम लोगों को पैसे भेजने के लिए मौजूदा कारोबारी साल में 335 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन भी हुए हैं। पिछले साल मार्च तक डीबीटी के चलते सरकारी खजाने को 1,41,677 करोड़ रुपए की बचत हुई थी, जिसमें इस साल और बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है। ये संख्या इसलिए अहम है क्योंकि ये वो राशि थी जो बिचौलियों की जेब में पहुंचता था।

डीबीटी योजना के अन्य फायदे
डीबीटी और आधार ने सिर्फ़ बिचौलियों और दलालों को ही रास्ता नहीं दिखाया है बल्कि इसके जरिए बड़े पैमाने पर हो रहे भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का भी खुलासा हुआ है.

  • 4.23 करोड़ डुप्लीकेट और फर्जी गैस कनेक्शन (एलपीजी) को हटाया गया
  • 2.98 करोड़ फर्जी राशन कार्ड का पता चला, जिन्हें निरस्त किया गया
  • ग्रामीण विकास मंत्रालय के फील्ड सर्वे के मुताबिक मनरेगा में कम से कम 10 फीसदी राशि की बचत हुई
  • वृद्धावस्था पेंशन जैसी सामाजिक योजनाओं में 4.77 लाख फर्जी मामलों का पता चला
  • अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय से मिलने वाली छात्रवृत्ति में 5.26 लाख फर्जी मामले सामने आए
  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से जुड़े स्कीम में 1.91 लाख लाभार्थी ऐसे मिले, जिनका कोई वज़ूद ही नहीं था
  • आंगनबाड़ी केंद्र के जरिए चल रहे कार्यक्रमों में 98.8 करोड़ फर्जी मामलों की जानकारी सामने आई
  • खाद सब्सिडी में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया और करीब 121 लाख मेट्रिक टन खाद की बचत हुई