साहित्य आजतक महाकुंभ में आशुतोष राणा का एक व्यंग

अदाकारी तो आशुतोष राणा की दमदार है ही, लेखनी की जादूगरी भी आपको बखूबी आती है, परंतु जिस अंदाज़ में आशुतोष राणा ने अपने स्वरचित व्यंग का वाचन किया, वह वाकई किसी जादू से कम नहीं है, अपने श्रोताओं का वशिकरण किस प्रकार किया जाता है यह आशुतोष राणा अपने वाचन में भलीभांति दर्शाया है।

सही मायने में आशुतोष राणा एक दुर्लभ कलाकार है, जो अपने दर्शक, अपने पाठक, और अपने श्रोताओं पर हर बार अपनी अमिट छाप बनाने में पुर्णतः सफ़ल हो जाते है। इनकी हर एक पोस्ट अपने आप में परिपुर्ण होती है। सुनिए जरा इनकी जुबानी “मुद्दा हल नहीं होता बल्कि उछलता है”