प्रयागराज: मुजफ्फरनगर एडीएम का स्टांप वेंडर का लाइसेंस रद करने के आदेश को खारिज, हाई कोर्ट ने कहा सुनवाई का मौका देना जरूरी

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प्रयागराज. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुजफ्फरनगर एडीएम का स्टांप वेंडर का लाइसेंस रद करने के आदेश को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि कार्रवाई से पहले दूसरे पक्ष को सुनना जरूरी है. दूसरे पक्ष को नोटिस अवश्य देना चाहिए. बगैर नोटिस आदेश पारित करना विधि सम्मत नहीं है. यह नैसर्गिक न्याय के मौलिक सिद्धांत का हनन है, मुजफ्फनगर तहसील के स्टाम्प वेंडर रविशंकर की याचिका पर जस्टिस एसपी केसरवानी और जस्टिस डॉ. वाईके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने आदेश दिया.

स्टांप वेंडर रविशंकर के खिलाफ तहसील बार एसोसिएशन ने दुर्व्यहार करने की शिकायत की थी. इसी आधार पर एडीएम ने उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया था. याची का कहना था कि मात्र एक शिकायत के आधार पर सुनवाई का मौका दिए बगैर उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया गया.

याची को कारण बताओ नो‌टिस दिया गया था लेकिन उसमें यह नहीं बताया गया था कि उसके खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता क्यों पड़ी और क्या कार्रवाई प्रस्तावित है. कोर्ट ने कहा कि इसे सही नहीं कहा है जा सकता है. निर्णयकर्त्ता को प्रभावित व्यक्ति को प्रस्तावित निर्णय के बारे में नोटिस देना चाहिए और उसे प्रत्यावेदन देने का अवसर देना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि एडीएम के आदेश में यह नहीं बताया गया है कि याची ने लाइसेंस की किस शर्त का उल्लंघन किया है.