बुखार और मलेरिया से बचाव की सलाह – मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

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छिन्दवाड़ा @ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.जे.एस.गोगिया ने सलाह दी है कि कोई भी बुखार आने पर व्यक्ति तुरंत जांच कराये, क्योंकि यह बुखार मलेरिया हो सकता है। यदि जांच में मलेरिया पाया जाये तो पूर्ण उपचार ले। विभाग द्वारा बुखार के सभी रोगियों की जांच एवं उपचार नि:शुल्क कराये जाने की व्यवस्था की गई है। उप स्वास्थ्य केन्द्रों एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक रेपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किट से मलेरिया की जांच की जा रही है और मलेरिया पाये जाने पर फेल्सिफेरम के रोगी को 3 दिन का पूर्ण उपचार एवं वायवेक्स मलेरिया पाये जाने पर 14 दिन का पूर्ण नि:शुल्क उपचार कराये जाने की व्यवस्था है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गोगिया ने बताया कि विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों तक आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया है कि यदि ठंड देकर बुखार आना, पसीना देकर बुखार उतरना, कपकपी आना, जी मचलाना, सिर दर्द, उल्टी इत्यादि मलेरिया के लक्षण है। बुखार आने की स्थिति में जांच एवं उपचार जरूरी है। व्यक्ति सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। पूरी आस्तीन के कपडे पहने। घर के आस-पास पानी जमा न होने दे। एकत्र पानी की निकासी करे और जहां पानी की निकासी का प्रबंध न हो ऐसे गढ्ढे में जला हुआ ऑईल/मिट्टी का तेल डाले, इससे मच्छरों के लार्वा नष्ट हो जाते है। गर्भवती महिलाओं को बुखार आने पर चिकित्सक की सलाह से उपचार लें। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जुलाई 2017 की समयावधि में गत वर्ष की तुलना में मलेरिया के प्रकरणों में कमी दर्ज की गई है। मलेरिया की रोकथाम के लिये यह आवश्यक है कि आम जनता मलेरिया से बचने के उपायों के बारे में जानकारी प्राप्त कर उससे बचने का प्रयास करें।