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एक अनसुलझा रहस्य आरुषि तलवार और हेमराज मर्डर मिस्ट्री

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नई दिल्ली में 15 मई, 2008 के दिन 13 वर्षीय आरुषि तलवार की आखरी रात थी। अगले दिन आरुषि को उसके बिस्तर पर एक सफेद चादर के नीचे खून से लथपथ पाया गया। उसका गला काटा गया था। बेडशीट, दीवारों और फर्श पर चारों तरफ खून था।


इंस्पेक्टर गुरदर्शन सिंह ने मामले की जांच की और पाया कि आरुषि के पिता राजेश तलवार का एक डेंटिस्ट के साथ विवाहेतर संबंध था। राजेश के विवाहेतर संबंध के बारे में आरुषि और परिवार के रसोइया हेमराज को पता था। आरुषि और हेमराज राजेश के अफेयर के बारे में चर्चा करते थे, जिससे राजेश को बहुत तकलीफ थी। इस कारण पुलिस को आरुषि के माता-पिता पर शक हुआ।

पेचीदा जांच-पड़ताल:

  • पुलिस ने बताया कि आरुषि की मौत से पहले उसका यौन उत्पीड़न किया गया था और उसे 12 बजे से 1 बजे के बीच मारा गया था।
  • पूरे कमरे में खून के धब्बे थे, जिससे संकेत मिलता था कि उसे कहीं और मारकर बाद में बिस्तर में डाला गया था।
  • अगली सुबह 16 मई को आरुषि के पिता राजेश नौकरानी के लिए घर का दरवाजा खोलने वाले थे, लेकिन उन्होंने उस दिन ऐसा नहीं किया।
  • पारिवारिक रसोइया हेमराज 16 मई को ही लापता हो गया था। मामला और उलझ गया जब हेमराज घर की छत पर मृत पाया गया।
  • राजेश के 3 सहायक अगले संदिग्ध थे। सीबीआई का मानना ​​था कि उन्होंने आरुषि के साथ गलत करने की कोशिश की थी और हेमराज को मार डाला क्योंकि वह उनकी करनी का गवाह था। लेकिन इसे साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं था।
  • तलवार जोड़े के अनुसार छत की चाबी गायब हो गई थी। घर का गेट बंद था और रात में कोई अन्य व्यक्ति घर में नहीं आया था।
  • हेमराज और आरुषि दोनों का मोबाइल नहीं मिला। आरुषि का मोबाइल 12:08 के बाद उठाया नहीं गया था जिसका अर्थ था कि वह तब तक मर चुकी थी।
  • एकमात्र मजबूत संदिग्ध आरुषि के माता-पिता राजेश तलवार और नूपुर तलवार ही थे। दोनों ने कहा कि वे आरुषि की चीखें नहीं सुन सके, जबकि उनका कमरा बेहद नजदीक था।
  • तलवार जोड़े ने कहा कि एसी की आवाज़ ने आरुषि की चीख को दबा दिया था। उन्होंने सीबीआई को यह भी बताया कि आरुषि को गले में संक्रमण था जिसके कारण उसकी चीखें सुनने योग्य नहीं थीं। दोनों को झूठ का पता लगाने के परीक्षण और नार्को विश्लेषण से निकाला गया, लेकिन परिणाम उनके पक्ष में ही निकला। उस रात फोन पर भी उनकी साधारण बातचीत हुई थी। लेकिन तलवार परिवार के रिश्तेदारों ने दावा किया कि उन्होंने अपनी इकलौती बेटी के खोने पर कोई खास दुख व्यक्त नहीं किया था।

2013 में तलवार जोड़े को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। बाद में उन्हें मजबूत सबूतों की कमी के कारण उच्च न्यायालय ने बरी कर दिया। यह मामला हाल ही के भारत के इतिहास के सबसे मुश्किल मामलों में एक था।