शहीद सीओ देवेंद्र मिश्र का पत्र वायरल होने के बाद उनका ऑफिस सील, जांच को पहुंची फोरेंसिक टीम

कानपुर में विकास दुबे को पकड़ने में शहीद हुए सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्र के शहीद होने के बाद उनके ऑफिस पर फोरेंसिक टीम जांच करने पहुंची। उनके दफ्तर में कई अहम दस्तावेज होने के चलते जांच-पड़ताल के बाद दफ्तर सील कर दिया गया है। इससे कि उनके दफ्तर के दस्तावेजों में कोई हेर-फेर नहीं कर सके।

सीओ बिल्हौर का सोमवार को एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसका उच्च अफसरों ने संज्ञान लिया। इसके बाद अफसरों के आदेश के बाद एसपी ग्रामीण बृजेश कुमार श्रीवास्तव सीओ बिल्हौर के कार्यालय जांच करने पहुंचे। इस दौरान फोरेंसिक टीम भी उनके साथ जांच-पड़ताल में शामिल रही। सीओ के कंप्यूटर की हार्ड डिस्क समेत अन्य दस्तावेजों को सुरक्षित कर लिया गया है। जांच-पड़ताल पूरी होने के बाद ही अब सीओ का दफ्तर खोला जाएगा। एसपी ग्रामीण ने बताया कि गोपनीय जांच चल रही है।

मोहित अग्रवाल, आईजी रेंज का कहना है कि मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली थी। तत्कालीन सीओ ने एसओ के लिए रिपोर्ट दी थी। पता लगाया जा रहा कि क्या आरोप और क्या मामला था। इसे सत्यापित किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी। वहीं दिनेश कुमार पी, एसएसपी ने बताया कि वायरल रिपोर्ट के बारे में बिल्हौर सीओ ऑफिस, एसपी ग्रामीण दफ्तर, एसएसपी के स्टाफ और दंड बाबू के ऑफिस में रिसीविंग और डिस्पैच रजिस्टर चेक कराया गया है। फिलहाल 14 मार्च की कोई रिपोर्ट या पत्र की रिसीविंग नहीं मिली है। इसके बावजूद जांच जारी है। यदि इसमें कोई तथ्य निकलता है तो उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

सीओ ने कहा था कि कुख्यात विकास कर सकता है बड़ी वारदात

बिकरू कांड में शहीद हुए सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्र ने कुख्यात विकास दुबे द्वारा किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की आशंका जताई थी जो सच साबित हुई। पत्र में निलंबित एसओ चौबेपुर की भूमिका व निष्ठा पर सवाल उठाए गए थे। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सीओ के तत्कालीन एसएसपी अनंत देव तिवारी को लिखे इस पत्र ने पुलिस महकमे में हलचल बढ़ा दी है। शहीद सीओ के परिजनों से मिलने पहुंचे आप नेता संजय सिंह को भी परिजनों की ओर से यह पत्र सौंपा गया है। इस पत्र को लेकर अधिकारी जांच की बात कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल रिपोर्ट के मुताबिक देवेंद्र मिश्र ने 14 मार्च को चौबेपुर थाने का निरीक्षण किया था। उन्हें पता चला कि 13 मार्च को विकास के खिलाफ वसूली के लिए धमकी, बलवा, मारपीट, जान से मारने की धमकी के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। जांच दरोगा अजहर इशरत को सौंपी गई। अगले ही दिन अजहर ने जान से मारने की धमकी देने की धारा 386 हटा दी। सीओ ने इसका कारण पूछा तो अजहर ने बताया कि थानेदार के कहने पर धारा हटाई गई। इस पर तत्काल सीओ ने थानेदार विनय तिवारी के खिलाफ एसएसपी को रिपोर्ट भेजी। इसमें लिखा कि एक दबंग कुख्यात अपराधी के विरुद्ध थानाध्यक्ष द्वारा सहानुभूति रखना व अब तक कार्रवाई न करना सत्यनिष्ठा को संदिग्ध करता है। रिपोर्ट के मुताबिक विनय का विकास दुबे के घर आना-जाना था। यदि थानेदार के खिलाफ कार्रवाई न की गई तो गंभीर घटना हो सकती है।

बेटी ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
शहीद सीओ की बेटी वैष्णवी ने वायरल रिपोर्ट पर कहा कि इस मामले में शासन को उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए। उसने कहा कि पिता के कातिलों को ऐसे नहीं जाने दिया जा सकता। उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। वह सरकार से जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग करती है।