ग्वालियर का दीपक फ्रांस में बिखेरेगा रोशनी
ग्वालियर। कहते हैं दीपक है तो रोशनी फैलाएगा। ऐसा ही कुछ हकीकत में भी संभव हो सकता है, अगर आपके सामने सच्ची लगन हो, मेहनत हो ,और हर कीमत पर अपना मुकाम हासिल करने का जुनून हो। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है ग्वालियर माटी के सपूत दीपक द्विवेदी ने जो अब फ्रांस में ऐविलिम्पिक मेें नाम रोशन करने के लिए भारत सरकार की ओर से जा रहे है।
 
बताया जा रहा है दीपक फ्रांस में आयोजित होने वाली तकनीकी प्रतियोगिता ऐविलिम्पिक में हिस्सा लेने के लिए विदेश जा रहे है। अभी वर्तमान में वह आईटीएम यूनिवर्स में सीनियर टेक्नीकल असिस्टेंट प्रोजेक्ट के पद पर कार्यरत है । दीपक कुमार ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि उन्होने इलेक्ट्रानिक्स व रोबोटिक्स में गहन सैद्वांतिक एंव व्यवहारिक अध्यन किया है। वहीं वह ऐबिलिम्पक्सि में पांच वार स्वर्ण पदक जीत चुके है। उन्होने बताया कि फ्रांस में आयोजित हेाने वाली इस प्रतियोगिता में 152देशों के लोग भाग ले रहे है जबकि मध्यप्रदेश के ग्वालियर से उनका व एक जबलपुर के युवक का चयन किया गया है। इस अवसर पर उदभव संस्था के अध्यक्ष डॉ केशव पाण्डेय,सचिव दीपक ताेमर ,सारथी कंस्ट्रक्शन के एमडी अशोक भारद्वाज मुख्य रूप से उपस्थित थे।
 
दिव्यांग है तो बस पैरों से
 
दीपक कुमार द्विवेदी पैरों से जरूर विकलांग है जबकि वह अंदर से बहुत उर्जावान है । बताते है कि वह मूलत:भिण्ड जिले के रौन तहसील के बौनापुरा गांव के है । बचपन से उनके पैरों ने साथ नही दिया । पिता का भी साया सिर से उठ गया । थोडी बहुत जमीन थी वह घर के लोगेां ने छीन ली । दो बहिनाें व अपनी मां के साथ बीस साल पहले ग्वालियर निकल आए । तब दिन दिन रात मेहनत करके अपने आप को कभी कमजोर महसूस नही होने दिया । दो बहिनो की शादी करने के बाद मां को अपने साथ रखते है। उनका कहना है कि वह आज कुछ जो भी है वह सब आईटीएम के चैयरमेन रमाशंकर सिंह की बदौलत ही है।