शॉपिंग करते समय मोलभाव करने की वजह से कहीं आप अपनों के बीच कंजूस तो नहीं माने जाते हैं?

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मोलभाव यानी बार्गेनिंग, शाॅपिंग और मोलभाव के बीच चोली दामन का रिश्ता है। कभी कभी मै उन लोगों को देखता हूँ जो आधे मूल्य में और कभी कभी तो एक चौथाई मूल्य में भी खरीददारी करते है। पर इसके लिए वे जितना समय लगाते हैं इतने समय तक उनके साथ खड़े होना भी मेरे लिए काफी दर्दनाक अनुभव हुआ करता है। पता नहीं मैं उन लोगों की तरह मोलभाव करना कभी सीख पाऊंगा या नहीं।

शॉपिंग का शौक अधिकतर महिलाओं को होता है और महिलाएं भावताव न करें तो शॉपिंग का मजा उनके लिए अधूरा रहेगा पर कभी-कभी भावताव करना महंगी भी पड़ सकता है या भावताव में कभी-कभी सामान गलत आ सकता है या दुकानदार पहले रेट अधिक लगाकर थोड़ा कम कर आपको बेच सकता है। इसके लिए आपको सतर्क रहना अति आवश्यक होता है।

ज्यादातर ये शिक्षा लोगों को अपने पैरेन्ट से प्राप्त हुई होती है। कुछ लोग तो इसमें हम बड़े माहिर होते हैं। मान लो अगर आप कोई भी चीज १०० में लाते हो , हम उसका रेट ४० से शुरू करेंगे।शायद इसी वजह से वे अपने परिवार और दोस्तों में कंजूस माने जाते हैं। और इसी कारण से हमे पैरेन्ट से भी डांट पड़ती है। पर क्या करें, आदत से मजबूर।

इस विषय पर प्रतीक्षा दास एक मज़ेदार किस्सा बताती है। एक बार हम और मम्मी दोनों मिलकर शॉपिंग के लिए निकले। और सच बताऊं हमे मॉल में जाकर शॉपिंग करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमे हमारा लोकल मार्केट ही सही है।

तो, एक शाम हम दोनों निकले। और काफी सारी चीजें खरीदी हमने। तो यूहीं टहलते हुए एक बढ़िया ना दुपट्टा दिख गया हमे। लाल रंग का कुछ इस तरह का । अब हमने सोचा चलो ले लिया जाए। जाके पूछा की कितने का है। तो, भाई साहेब २२०० बोलने लगे। अब हम इस जवाब पर हंस की आश्चर्य होएं। एक दुपट्टे का २२०० ?

अब आती है मम्मी की बारी । हमारा यकीन मानिए, मम्मी ने 250 से शुरू किया, और यूहीं करते करते। 15-20 मिनट के बाद हमने वह दुपट्टा 450 में खरीदा। तो यह हुई ना टैलेंट वाली बात।

वही पीयूष कुमार नाहटा बतातें है कि एक बार बाजार में मैंने एक केप खरीदी। मैंने दुकानदार से उसका मूल्य पूछा तो उसने ₹130 बताया। मैंने मोलभाव करने की कोशिश की और उससे बोला कितना कम करोगे।

तो उसने ₹120 के लिए हां की। मैं बड़ा खुश हुआ कि मैंने ₹10 कम करवा लिए और उसे ₹200 दिए। आश्चर्य कब हुआ जब उसने मुझे ₹100 वापस कर दिए। शायद उसे ज्यादा बारगेनिंग करने की उम्मीद रही होगी जब मैंने ऐसा नहीं किया तो उसने खुद ही ₹20 और कम कर दिए।

इस प्रकार मैंने पहली बार बताई गई कीमत से ₹30 कम में खरीदारी की। मुझे याद आता है कि मैंने इस सफलता के बारे में कितने सारे लोगों को बताया जो मेरी मॉलभाव ना करने की आदत से परेशान थे।

शॉपिंग करते समय अधिकतर लोग भावताव जरूर करते हैं पर भावताव सभी लोग अच्छे से नहीं कर पाते। यह भी अपने आप में एक गेम है। जैसे हर कोई गेम खेलने में निपुण नहीं होता, ऐसा भावताव गेम के साथ भी है। उसके भी कुछ नियम होते हैं जिन्हें अपना कर वस्तु को सही दाम में खरीदा जा सकता है और दुकानदार के साथ संबंध भी अच्छे रखे जा सकते हैं|

रेट कम कराने के लिए रिक्वेस्ट न करें

साथ ही यह भी ध्यान रखें कि कहीं आप बेकार की डिमांड के पीछे तो नहीं पड़ी हैं। खुद को थोड़े समय के लिए दुकानदार मान कर सोचें। रेट कम कराने के लिए बहुत रिक्वेस्ट न करें, न ही उनके पीछे पड़ जाएं। सेल्समैन के साथ मधुर स्वर में बात करें। चेहरे पर मुस्कान बना कर रखें। ऐसा करने से सेल्समैन भावताव के समय आपकी मदद करेगा।

रेट का आइडिया लें

कुछ भी प्रोडक्ट खरीदते हुए उसकी मार्केट में खोजबीन कर लें जिससे आप क्वालिटी और रेट दोनों कंपेयर कर सकते हैं और आइटम की मार्केट वैल्यू भी पता लग सकती है। कुछ दुकानें ऐसी होती हैं जहां फिक्सड प्राइस होते हैं। यदि आपका आइटम वहां उपलब्ध हो तो सबसे पहले वहां से रेट का आइडिया लें, बाद में अन्य दुकानों पर जाएं।

यूनीक आइटम्स हमेशा उपलब्ध नहीं होते
सर्व प्रथम यह तय कर लें कि आपको खरीदना क्या है, उसका बजट तय कर लें ताकि बाजार में समय व्यर्थ न हो। फिर मोलभाव पर फोकस कर फैसला करें कि आपकी जरूरत की वस्तु आपको ठीक मोल पर मिल रही है तो खरीद लें। कई चीजों को पसंद कर एक ही बार में सबके मोल न पूछें। इससे दुकानदार सोच सकता है कि आप खुलकर शापिंग करने वाले हैं और वो उनके रेट अधिक कोट कर सकता है। न ही किसी खास पसंद चीज की बार-बार प्रशंसा करें। उसे लगेगा कि उक्त वस्तु आपको पसंद है और वो मोल कम नहीं करेगा। कोई विशेष वस्तु पसंद आ जाए तो मन में वो कितने में खरीदनी है, तय कर लें। हां, थोड़ा तैयार रहें कि उस पर आप थोड़ा अधिक भी खर्च कर सकती हैं क्योंकि यूनीक आइटम्स हमेशा उपलब्ध नहीं होते। ऐसा मौका गंवाएं नहीं।

राउंड फिगर का प्रयोग न करें
मोल भाव करते समय राउंड फिगर का प्रयोग बिलकुल भी न करें। थोड़ा ऊपर जैसे 20 रूपये, 35 रूपये लगाकर बोलें। इससे दुकानदार महसूस करेगा कि आप मार्केट पहले से सर्च कर के आए हैं। भावताव प्रारंभ से ही 50-60 परसेंट न करें। बताई गई कीमत पर शुरूआत 40 परसेंट से करें, न बात बने तो 35 परसेंट पर आएं। हो सकता है दुकानदार आपको 20 से 25 परसेंट छूट दे दे। भावताव के दौरान जो वस्तु आपने पसंद की है उसे दोबारा अच्छी तरह से निहारें ताकि दुकानदार को रेट फाइनल करने का थोड़ा वक्त और मिल जाए। हो सकता है कि आपके बताए मोल पर आपको वस्तु दे दे।

हमेशा दुकानदार से जो चीज पसंद हो, उसके रेट पहले जान लें और उसे आपने क्या रेट देना है, इस बात का पता प्रारंभ में न लगने दें। जब वस्तु से पूरी तरह संतुष्ट हों, तभी मोल भाव करें। शॉपिंग पर जब भी जाएं, एक्स्ट्रा समय लेकर जाएं ताकि आप मार्केट में रेट और वस्तु की जांच कर सकें।