खूबसूरत प्रेम कहानी : अल्लाउद्दीन की बेटी का जालोर के युवराज वीरमदेव से प्रेम

इस ख़बर को शेयर करें:

कबर महँन था ,ये याद करवाना जरुरी समझा गया लेकिन इस देश के वीर योद्धाओं का इतिहास बताना क्यों जरुरी नहीं था ? कमाल की बात यह है कि इसे इतिहास की किताबों में क्यों नहीं पढ़ाया गया ? यही मुझे मजबूर करती है ये सोचने के लिए कि किसी खास मकसद के साथ इतिहास को लिखा गया है जो संदेहपूर्ण है .

अल्लाउद्दीन की बेटी के मौत का रहस्य ?

बताया जाता है कि जब अलाउद्दीन खिलजी की सेना गुजरात के सोमनाथ मंदिर को खंडित करने के बाद शिवलिंग को लेकर दिल्ली लौट रही थी तभी जालौर के शासक कान्हड़ देव चौहान ने शिवलिंग को पाने के लिए खिलजी की सेना पर हमला कर दिया था.

इस हमले में अलाउद्दीन की सेना को हार का सामना करना पड़ा औरअपनी जीत के बाद कान्हड़ देव ने उस शिवलिंग को जालौर में स्थापित करवा दिया. जब अलाउद्दीन को अपनी सेना की हार का पता चला तब उसने इस युद्ध के मुख्य योद्धा और कान्हड़ देव चौहान के बेटे वीरमदेव को दिल्ली बुलाया.

मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि दिल्ली पहुंचने के बाद अलाउद्दीन खिलजी की बेटी फिरोजा की नजर राजकुमार वीरमदेव पर पड़ी और उसे पहली नजर में ही राजकुमार से प्यार हो गया.

फिरोजा ने अपने पिता खिलजी से कहा कि वो राजकुमार से प्रेम करती है और उससे शादी करना चाहती है. आखिरकार अपनी बेटी के इस जिद के आगे अलाउद्दीन हार गया और उसने अपनी बेटी के रिश्ते का प्रस्ताव वीरमदेव के सामने रखा.

जिसके बाद वीरमदेव ने वक्त की नजाकत समझते हुए इस रिश्ते पर विचार करने के लिए कहा, लेकिन जालौर लौटने पर इस रिश्ते के लिए मना कर दिया. जब वीरमदेव ने अलाउद्दीन की बेटी से रिश्ते का प्रस्ताव ठुकरा दिया तब गुस्से में आकर अलाउद्दीन ने अपनी सेना के साथ जालौर पर हमला कर दिया.

खिलजी वीरमदेव को बंदी बनाकर रखना चाहता था उधर उसकी बेटी वीरमदेव के प्यार को पाने के लिए दिन-रात तड़प रही थी. अलाउद्दीन ने एक बड़ी फौज तैयार करके जालौर भेजा और उसकी सेना से लड़ते हुए वीरमदेव वीरगति को प्राप्त हुए. वीरमदेव की मौत की खबर सुनकर फिरोजा अंदर से बिल्कुल टूट सी गई और उसने यमुना नदी में कूदकर अपनी जान दे दी.

गौरतलब है कि फिरोजा राजकुमार वीरमदेव से एक-तरफा मोहब्बत करती थी और उस हिंदू राजकुमार की मौत के बाद अपनी जान देकर फिरोजा ने अपने प्यार को हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया.

बताया जाता है कि देवल रानी महारानी कर्णवती और रामचन्द्र देव् की बेटी थी लेकिन अलाउद्दीन कर्णवती से जबरदस्ती विवाह कर लिया था अलाउद्दीन ने उनकी बेटी का नाम था देवल रानी जिसके ऊपर अमीर खुसरों ने पूरा एक ग्रन्थ लिखा है “अशिका” वह बहुत सुंदर थी ।

अलाउद्दीन की मृत्यु के बाद जितने भी सुल्तान हुए सब के सब देवल रानी उर्फ अशिका से विवाह करना चाहते थे जो भी दिल्ली के सिंहासन पर बैठता वो अशिका को जबरदस्ती अपने हरम में धकेल देता था । इसी से तंग आकर अशिका ने आत्महत्या कर ली थी ।

ऐसा कहा जाता है कि जालोर के युवराज वीरमदेव के पराक्रम,व्यक्तित्व और शोहरत से प्रभावित होकर खिलजी की बेटी को प्रेम हो गया .लेकिन इस प्रेम को शूरवीर वीरमदेव ने कभी स्वीकार नहीं किया इसलिए फिरोजा ने अपनी जान दे दी .