भिण्ड-मुरैना की चंबल घाटी जहाँ कभी था डाकुओं का राज
इस ख़बर को शेयर करें

डाकुओं का गढ़ ‘चंबल’ सच्चाई ये है चंबल अब डाकुओं से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। चंबल के बीहड़ में जहाँ किसी जमाने में डाकू रहते थे, मध्यप्रदेश का भिण्ड़ – मुरैना और राजस्थान का कुछ हिस्सा आता है।

चंबल घाटी में भिण्ड जिले का ऐतिहासिक विवरण – भिंड किला 18वीं शताब्दी में भदावर राज्य के शासक गोपाल सिंह भदौरिया ने बनवाया था। भिण्ड किले का स्वरूप आयताकार रखा गया था, प्रवेश द्वार पश्चिम में है। इस आयताकार किले के चारों ओर एक खाई बनाई गई थी। दिल्ली से ओरछा जाने के मार्ग के मध्य मेंं होने से यह किला अत्यन्त महत्वपूर्ण था।वर्तमान मेंं ये सुन्दर भवन खण्डहर मेंं परवर्तित होकर नष्ट हो चुका हैंं।

कहा जाता है कि भिण्ड जिला जब से सिन्धिया के अधीन हुआ तभी से भदौरिया राजाओं की निर्माणकला के नमूने खण्डहर कर दिये गये थे। तत्कालीन भिण्ड प्रदेश के भदावर तथा कछवाहोंं के लिये दौलतराव सिन्धिया एक क्रूर शासक के समान था, जिसने उनकी स्वतन्त्र सत्ता का अन्त कर दिया। भिण्ड जिला जबसे सिन्धिया के अधीन हुआ तभी से भिण्ड के किले मेंं सभी कार्यालय स्थापित कर दिये गये थे।

उस समय जिलाधीश को सूबा साहब कहा जाता था, तब से लेकर नवीन भवन बनने तक कलेक्टर कार्यालय तथा कचहरी, दफ्तरोंं व कोषालय सहित समस्त आफिस भिण्ड किले मेंं ही स्थापित रहे। आज के समय में किले के दरबार हाल मेंं पुरातत्व संग्रहालय है। एक भाग मेंं शासकीय कन्या महाविद्यालय संचालित है, एक भाग मेंं होमगार्ड कार्यालय तथा सैनिकोंं के निवास हैंं।

शेष भाग वीरान पडा है, जो धीरे धीरे खण्डहर होता जा रहा है। किले की चारो ओर की प्राचीर मेंं अतिक्रमणकारी खुदाई मेंं लगे रहते हैंं, इससे इस इतिहासिक धरोहर को क्षति पहुँच रही है। दुखद बात ये है कि पुरातत्व विभाग भी इसकी देखरेख में कोई रूचि नहीं ले रहा।

वर्तमान स्थिति – ऐसा माना जाता है कि भिण्ड का नाम महान भिन्डी ऋषि के नाम पर रखा गया है। भिंडी ऋषि च्यवन ऋषि के वंसज थे जो यदुवंश से थे। इनका काल भारतीय धर्म ग्रंथो के अनुसार सतयुग है।

  • भिण्ड जिले को भदावरगार (भदौरियों का राज्य) भी कहा जाता है।
  • भिंड जिला भोपाल, इंदौर और जबलपुर के बाद मध्यप्रदेश का सर्वाधिक पुरूष साक्षर जिला है।
  • भारत के सर्वाधिक साक्षर जिलों में से एक भिण्ड, मंत्रमुग्ध कर देने वाली वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है।
  • भिंड चम्बल नदी के बीहड़ के लिए भी प्रसिद्ध है, जहाँ कुछ समय पहले तक डाकुओं का राज़ रहा। लेकिन आज के समय में भिण्ड की एक नई पहचान बनी है। भिंड जिले से करीब 30,000 सैनिक देश की सुरक्षा में तैनात हैं।
  • मालनपुर यहाँ का औद्योगिक क्षेत्र है, जो कि गोहद तहसील में ही पड़ता है। जिसे सूखा पॉर्ट भी कहा जाता है।

भिंड के पर्यटन स्थलों के बारे में

अब बात करते हैं आप घूमने आ सकते हैं या नहीं। तो हाँ, भिण्ड डाकुओं से पूरी तरह मुक्त है, आप यहाँ घूमने आ सकते हैं। 

अटेर का किला – इसका निर्माण भदौरिया राजा बदन सिंह, महा सिंह और बखत सिंह द्वारा 1664-1668 के काल में किया गया था। इनके नाम पर ही इस क्षेत्र को “भदावर” के नाम से जाना जाता है l यह चंबल की गहरी वादियों के अन्दर स्थित है l वर्तमान में यह खंडहर की अवस्था में हैl ‘खूनी दरवाजा’(इसकी एक अलग कहानी है) , ‘बदन सिंह का महल’, ‘हथियापुर’, ‘राजा का बंगला’, ‘रानी का बंगला ‘ और ’बारह खंबा महल’ किले के मुख्य आकर्षण हैं। भिण्ड किले से लगभग 30 किमी दूर ये किला स्थित है। भव्यता में शायद ये आपको अच्छा ना लगे, क्योंकि अन्य किलों की तरह इसका कभी रखरखाव नहीं किया गया, किन्तु अगर आप ऐतिहासिक इमारतों के शौकीन हैं, तो ये किला आपको पसंद आयेगा।

दंदरौआ धाम – ये एक प्राचीन मंदिर है। यहाँ पर प्रतिष्ठित हनुमान जी की मूर्ति डॉ हनुमान के नाम से प्रसिद्ध है, ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में स्थित कुंड के जल से स्नान करने से सभी प्रकार के चर्म रोग और त्वचा संबंधी बीमारियाँ खत्म हो जातीं हैं।
वनखंडेश्वर मन्दिर – ये पृथ्वीराज चौहान द्वारा निर्मित एक शिवालय है। जो कि गौरी सरोवर के निकट है।
गौरी सरोवर – भिण्ड में गौरी सरोवर अपने आप में एक पर्यटन स्थल है। गौरी सरोवर पर बहुत से पार्को को नए रूप से विकसित किया गया हैं। गौरी सरोवर एक नौका विहार है, यहाँ राष्ट्रीय नौका प्रतियोगिता का आयोजन होता है।
कालिका माता मंदिर – ये एक भव्य विशाल मंदिर है, जहाँँ माघ के महीने में हर शनिवार विशाल मेला लगता हैै। जिसमें लाखों की संख्या में दूर दूर से श्रद्धालु आते है।
शिव मंदिर – भदौरिया कुल के ईष्टदेव भगवान शिव हैं। तो इस कारण भिंड में शिव के मंदिरों की श्रृंखला में 100 से अधिक मंदिर है जो अपने आप में एक धाम हैंं। साथ ही इन मंदिरों की अपनी-अपनी महत्ता है।
भिण्ड जिले के कनावर कोट में क्वारी नदी के पास भदौरिया वंश की कुलदेवी माँ काली माता का एक बहुत प्राचीन मंदिर स्थित है ।

भिण्ड जिले की लहार तहसील के आलमपुर नगर में स्थित इंदौर राजघराने की कुलवधु देवी अहिल्याबाई होलकर का छत्री ट्रस्ट भी काफी प्रसिद्ध है। (यह छत्री सम्पूर्ण भारत मे केवल इन्दौर और भिंड के आलमपुर मेंं ही है।)

मध्यप्रदेश में सबसे कम वर्षा भिण्ड में होती है। चंबल नदी भी गहरे खड्डों का निर्माण करती है, जिन्हें बीहड कहा जाता है। यहाँ ना तो आपको अधिक हरियाली मिलेगी और ना राजस्थान की तरह रेत। चंबल एक्सप्रेस वे को मंजूरी मिलने से ऐसा अनुमान है कि भिण्ड भी अब पर्यटन शहर की तरह विकसित किया जायेगा। तब शायद इस शहर को वो पहचान मिले, जिसका ये हकदार है।

कैसे आये
अगर आप भिण्ड-मुरैना की चंबल घाटी घूमने का प्लान बना रहे है तो कितनी भी दूर से यहाँ आयेंगें तो मैं नहीं चाहता कि आपका समय और पैसा बर्बाद हो। इसलिए आपको बता दूँ कि भिण्ड में छोटे मोटे गेस्ट हाऊस हैं, कोई बडा होटल नहीं है। यातायात के लिये जीप या ऑटोरिक्शा आसानी मिल जायेंगें। भिण्ड रेलवे स्टेशन है पर लंबी दूरी की ट्रेनें यहाँ कम ही रूकतीं हैं, ऐसे में आप ग्वालियर या इटावा रेलवे स्टेशन पर उतर सकते हैं, दोनों शहरों से भिण्ड की दूरी काफी कम है। हवाई यात्रा के लिये आप ग्वालियर हवाई अड्डा चुन सकते हैं। आपको सलाह दूँगा कि आप ग्वालियर आयें। यहाँ कई बड़े बड़े होटल हैं। ग्वालियर में कई पर्यटन स्थल हैं।

भिण्ड अपराधों के मामले में पहले सरकारी आँकडों पर नजर डालिये – NCRB की रिपोर्ट है।