बीजेपी ने 303 सीटों पर जीत दर्ज करके रचा इतिहास

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भारतीय इतिहास में बीजेपी ने पहली बार 300 या उससे ज्यादा सीटें जीती हैं. बीजेपी कांग्रेस के बाद ऐसी दूसरी अकेली पार्टी है जिसने 300 सीट की जीत का आंकड़ा टच किया है. पिछले चुनाव में भी बीजेपी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था और उसने अकेले ही 282 सीटें जीत ली थीं, जबकि इस बार भगवा पार्टी ने अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए 21 सीटें ज्यादा जीती और रिकॉर्ड (303 सीट) बना दिया.

गठबंधन के आधार पर बात करें तो बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए के खाते में 353 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस नीत यूपीए के खाते में 91 सीटें आई. जबकि शेष अन्य को 98 सीटें मिलीं. 2014 के चुनाव में 8 राजनीतिक दलों ने जीत की दहाई लगाई थी, लेकिन इस बार 9 दलों ने 10 के आंकड़े को छुआ. हालांकि पिछले चुनाव में 2 दलों को 9-9 सीटें मिली थीं.

नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए ने जोरदार अंदाज में जीत हासिल करते हुए फिर से सत्ता में वापसी की है. एनडीए की यह जीत 5 साल पहले की तुलना में ज्यादा बढ़ी और ऐतिहासिक है. सिर्फ बीजेपी ने ही नहीं बल्कि कई अन्य दलों के लिए यह चुनाव खास रहा और रिकॉर्ड बनाया.

नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए ने जोरदार अंदाज में जीत हासिल करते हुए फिर से सत्ता में वापसी की है. एनडीए की यह जीत 5 साल पहले की तुलना में ज्यादा बड़ी और ऐतिहासिक है. मतगणना 35 घंटे से ज्यादा देर तक चली जिसमें बीजेपी ने बंपर जीत हासिल की. अंतिम सीट का परिणाम भी बीजेपी के पक्ष में गया. इस बार चुनाव में 9 दलों ने 10 या उससे ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की है.

543 में से 542 संसदीय सीटों पर मतदान कराया गया जिसमें सभी 542 सीटों के रिजल्ट घोषित हो चुके हैं. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सबसे ज्यादा 303 सीटों पर जीत हासिल की है. अंतिम फैसला अरुणाचल प्रदेश की अरुणाचल प्रदेश वेस्‍ट संसदीय सीट से आया जहां पर बीजेपी ने जीत हासिल की. बीजेपी के उम्मीदवार किरन रिजिजू को यहां पर 1,74,843 मतों के अंतर से जीत मिली.

इस चुनाव में बीजेपी के बाद कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है और उसने 52 सीटों पर जीत हासिल की है. पिछली बार की तुलना में इस बार कांग्रेस का प्रदर्शन बढ़िया रहा है. पिछले चुनाव में उसे 44 सीटें मिली थीं. इसके बाद चुनाव में तीसरी सबसे सफल पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कडगम (डीएमके) है जिसने तमिलनाडु में 23 सीटों पर कब्जा जमाया है. खास बात यह है कि डीएमके ने तमिलनाडु में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था.

2014 के चुनाव में चौथी सबसे सफल पार्टी का दर्जा ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के पास था और इस बार भी सबसे ज्यादा सीट जीतने के मामले में वह चौथे स्थान पर रही. हालांकि 5 साल पहले उसकी स्थिति बेहद मजबूत थी क्योंकि उसके 34 सांसद लोकसभा पहुंचे थे, लेकिन इस बार वह महज 22 सीटों पर सिमट गई.

पांचवें स्थान पर आंध्र प्रदेश में 22 सीटों पर जीत हासिल करने वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी है जिसने इस बार चुनाव में बेहद शानदार प्रदर्शन किया है. 22 में से 21 सीटों पर उसका कब्जा हो चुका है. छठे स्थान पर शिवसेना है जिसने 18 सीटें जीती हैं.

एनडीए में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना के बाद जनता दल (यूनाइटेड) यानी जेडीयू इस चुनाव में सातवीं सबसे सफल पार्टी है और उसे 16 सीटों पर जीत मिली है. इसके अलावा बीजू जनता दल (12) और बहुजन समाज पार्टी (10) दो अन्य सफल दल हैं जिन्हें 10 या उससे ज्यादा सीटों पर जीत हासिल हुई है.

रामविलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी को 6 सीटों पर जीत मिली तो 2 दलों (समाजवादी पार्टी और एनसीपी) को 5-5 सीटों पर जीत हासिल हुई. इसके अलावा इस चुनाव में 15 दलों को 1-1 सीट पर जीत मिली, वहीं 4 दलों ने 2-2 और 4 दलों ने 3-3 सीटों पर जीत हासिल की. 4 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गई हैं.

17वीं लोकसभा के गठन को लेकर 7 चरणों में कराए गए मतदान की मतगणना 23 मई को देश के कई मतगणना स्थलों पर शुरू हुई थी. वेल्लौर लोकसभा सीट पर चुनाव स्थगित कर दिया गया था.