पीएचडी सीट में गुपचुप तरीके से प्रवेश देने का मामला, विज्ञापन में नहीं दिखाई पीएचडी की सीट
 
प्रदेश के एक
मात्र वेटनरी विश्वविद्यालय की पीएचडी सीट में गुपचुप तरीके से प्रवेश देने का
मामला सामने आया है। विवि के 19 विभागों ने पीएचडी में प्रवेश का विज्ञापन निकाला
जिसमें वन्य जीव स्वास्थ्य एवं प्रबंधन विभाग ने अपने विभाग में पीएचडी की सीट
संख्या शून्य दिखाई, लेकिन गुपचुप रूप से एक छात्र को बैठाकर परीक्षा ले ली और
सभी विभागों के छात्रों में सबसे ज्यादा नंबर भी दे दिए। अब विवि प्रशासन,
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और वेटनरी कौंसिल ऑफ इंडिया
जांच की बात कह रहे हैं।
 
वेटनरी विवि
की पीएचडी कोर्स का संचालन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) नई दिल्ली करती
है। आईसीएआर और वेटनरी कौंसिल ऑफ इंडिया (वीसीआई) ने छात्रों से शिकायत लिखित
शिकायत करने को कहा है ताकि वे इस मामले को संबंधित मंत्रालय तक पहुंचा सकें। विवि
के कुलपति ने भी मामले से जुड़े दस्तावेज विभाग से मांगे हैं।
 
विवि के 110
छात्रों ने लिखित शिकायत की है। छात्रों का आरोप है कि रिजर्व कैटेगरी के छात्रों
को जीव स्वास्थ्य एवं फारेंसिक सेंटर के वरिष्ठ प्रोफेसर द्वारा धमकी दी जा रही है
कि वो विवि में रिक्त पड़े शैक्षणिक पदों की योग्यता बदलवाकर अन्य विषय के
उम्मीदवारों को भर्ती कर लेंगे।
 
किसने क्या
कहा
 

मामले की
जानकारी मेरे पास नहीं है। इस संबंध में जो भी दस्तावेज छात्रों के पास हैं,
मुझे उपलब्ध कराएं। मामला 2013 का है। उस वक्त मैं पद में
नहीं था। इस विषय में जो संभव होगा वो किया जाएगा। प्रो.प्रयाग
दत्त जुयाल, कुलपति वेटनरी विवि जबलपुर

 

विवि में
पीएचडी को लेकर जो फर्जीवाड़ा हुआ है, उसकी जांच होनी चाहिए। यदि छात्र इसकी शिकायत वीसीआई को
देते हैं तो मैं खुद इस मामले को आईसीएआर और कृषि मंत्री के समझ रखंगूा। प्रदेश को
एक मात्र वेटनरी विवि के संबंधित विभाग में एक सीट है,
जो कि महत्वपूर्ण है। यदि इसमें फर्जी वाड़ा हुआ है तो जांच
होना चाहिए। उमेश शर्मा,
अध्यक्ष, वीसीआई नईदिल्ली