साध्वी ने लंदन में नौकरी छोड़ आध्यात्म का मार्ग अपनाया
भोपाल :
अध्यात्म में वह शक्ति है जो किसी भी व्यक्ति को किसी भी अवस्था से अपनी ओर खींचने
में सक्षम है! ऐसा ही एक उदाहरण मिला है सिंहस्थ महाकुंभ में आये श्री निरंजनी
पंचायती अखाड़ा श्री कृष्ण आश्रम नई दिल्ली में। यहाँ की प्रमुख महामण्डलेश्वर
साध्वी नम्रता गिरि करीब 18 वर्ष पूर्व हरिद्वार आई थीं और स्वामी गणेशानन्द से
दीक्षा लेकर यहीं रम गईं।
साध्वी ने
बताया कि उनके पूर्वज भारत से मारीशस गए थे। मारीशस में ही उनका जन्म हुआ। वे लंदन
में नौकरी करने लगीं। उनका झुकाव शुरू से धार्मिक और समाज सेवा का था,
तो वे लंदन से 1998 में भारत चली आईं और यहीं अध्यात्म में
रम कर संत बन गईं। उन्होंने बताया कि लंदन में उनके भाई-बहन रहते हैं,
किन्तु उनका मन लोगों की सेवा में है। वे भजन-कीर्तन कर
लोगों को प्रवचन देती हैं।

साध्वी ने
बताया कि मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना बहुत ही अच्छी है। इस योजना
में बुजुर्ग लोगों को निःशुल्क तीर्थ-यात्रा करवाकर आध्यात्मिक लाभ दिया जा रहा
है। उन्होंने सिंहस्थ की व्यवस्थाओं को भी सराहा।