गर्मी में गहरी जुताई से लाभ
दतिया |
किसान कल्याण एवं कृषि उपसंचालक श्री एसपी शर्मा ने जानकारी
देते हुए बताया कि गर्मी में गहरी जुताई करने से चना,
मसूर आदि रबीकालीन फसलों में उकठा (विल्ट) फफूंद
अल्टरनेरिया रोगों का प्रभावी नियंत्रण संभव हो पाता है। साथ ही खरीफ की फसल में
भी भूमि जनित रोगों का प्रभावी नियंत्रण होता है। क्योंकि इस रोग के वाहक कीट,
जर्म आदि भूमि की सतह पर आकर 40-45 डिग्री सेल्सियस तापक्रम
पर मर जाते हैं। 
समय रहते किसान भाई यदि गहरी जुताई कर लेवें तो मृदा जनित रोग,
कीट, लार्वा, भूमि में नीचे रहने वाले पैथोजन,
नीमाटोडा, कीड़े के अंडे, दीमक खरपतवारों के बीज, बहुवर्षीय खरपतवारों के कंद/प्रकंद गहरी जुताई के दौरान
कूंढ-खुलाव के दौरान मृदा की ऊपरी सतह पर आकर तेज धूप के कारण निष्क्रिय होकर नष्ट
हो जाते हैं। इसके साथ-साथ गहरी जुताई से मृदा की हार्डपान यानी कठोर परत,
मृदानमी ग्रहण-क्षमता मृदा ढेले टूटकर भुरभुरापन बढाकर मृदा
की भौतिक संरचना में सुधार होता है। 
गहरी जुताई को प्रति 3-4 वर्षो में एक बार
कराना उचित होता है। हार्डपन जो कि भूमि के नीचे 15-20 सेमी गहराई पर बन जाता है।
उसे गहरी जुताई की कर्षण क्रिया द्वारा तोड़ दिया जाता है ताकि पौधों की जड़े निचली
मृदा सतह तक सुगमता से जाकर पानी एवं पोषक तत्वों का भरपूर दोहन कर सके। हार्डपान
टूटने से भविष्य में खेतों में जलमग्नता की स्थिति नही निर्मित होती है। इस प्रकार
व्यापक दृष्टिकोण से भूमि की गहरी जुताई का निश्चित तौर पर महत्व वढ जाता है। अधिक
जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।