बाघों के साथ पन्ना टाइगर रिजर्व में पर्यटक संख्या भी बढ़ रही
भोपाल : पन्ना
टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या के साथ पर्यटक संख्या में भी इजाफा हो रहा
है। पिछले साल के मुकाबले इस साल पर्यटक संख्या दोगुनी होने की संभावना है। पन्ना
राष्ट्रीय उद्यान में वर्ष 2014-15 में जुलाई से जून के दौरान 19 हजार 371
देशी-विदेशी पर्यटक ने 4,587 वाहन से भ्रमण किया। यह संख्या वर्ष 2015-16 में
अप्रैल तक 32 हजार 923 हो गयी, जिसमें 24 हजार 165 देशी और 8758 विदेशी पर्यटक शामिल हैं।
वर्षाकाल में पाण्डव फॉल ओर स्नेह फॉल देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या के
मद्देनज़र यह संख्या जुलाई में काफी अधिक बढ़ने की संभावना है। वर्ष 2010-11 में
उद्यान की पर्यटन आय 49 लाख 25 से बढ़कर वर्ष 2015-16 (अप्रैल) में एक करोड़ 4 लाख
33 हजार पहुँच गयी है।
पन्ना टाइगर
रिजर्व पहुँचने वाले पर्यटक बाघ, वन्य-प्राणियों के अलावा पाण्डव फॉल और केन-घड़ियाल अभयारण्य
में स्थित रनेह फॉल के रमणीक सौंदर्य का लुत्फ उठाना भी पसंद करते हैं। जुलाई से
शुरू होने वाले पर्यटन वर्ष 2015-16 में अप्रैल तक 35 हजार 562 देशी-विदेशी पर्यटक
पाण्डव फॉल का दीदार करने पहुँचे। केन घड़ियाल स्थित रनेह फॉल भी अपने अप्रतिम
पाषाणीय सौंदर्य से पर्यटकों के आकर्षण का नया केन्द्र बनता जा रहा है। वर्ष
2015-16 में अप्रैल तक 36 हजार 549 पर्यटक यहाँ पहुँचे।
बढ़ रही हैं
सुख-सुविधाएँ
पर्यटकों के
लिये वन विभाग द्वारा कर्णावती अतिथि-गृह, हिनौता, रनेह फॉल और मड़ला में सुविधायुक्त आधुनिक हट्स,
टेन्ट और डोरमेटरी सुविधा उपलब्ध करवायी जा रही है।
साफ-सुथरे सुविधायुक्त हट्स और टेन्ट में रुकने का किराया 1000 से 2000 रुपये और
डोरमेटरी का 300 से 500 रुपये प्रतिदिन है। पर्यटकों को उत्कृष्ट सेवाएँ देने के
लिये समय-समय पर ईको विकास समिति के अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षित भी किया
जा रहा है।
केरल के
पेरियार में प्रशिक्षण

अतिथि सत्कार
में बेहतरी के लिये हिनौता ईको विकास समिति के आठ सदस्य ने केरल के पेरियार टाइगर
रिजर्व में 4 दिवसीय प्रशिक्षण लिया। पेरियार ईको टूरिज्म समिति ईको पर्यटन,
आवास सुविधा और भ्रमण क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएँ विकसित
करने के लिये जानी जाती हैं। पेरियार में ऑनलाइन बुकिंग,
रिसेप्शन प्रबंधन, पंजीयन, व्यवहार, सत्कार, स्वच्छता, हाउस-कीपिंग, पाक-व्यवस्था, कच्चा माल गुणवत्ता परीक्षण, राशन का भण्डारण, भोजन परोसने की कला आदि का प्रशिक्षण लिया गया। इसके अलावा
दल ने पक्षी अवलोकन, वन्य-प्राणी दर्शन, बफर क्षेत्र में फूड पेट्रोलिंग,
स्थानीय लोक नृत्य-नाटिका, राशि प्रबंधन आदि का भी प्रशिक्षण लिया।