ज्यादातर लिखने के लिए लोग काली स्याही की अपेक्षा नीली स्याही वाले पेन का उपयोग क्यों करते हैं?
इस ख़बर को शेयर करें

भौतिकी विज्ञान के शिक्षक राजेन्द्र कुमार चौधरी के अनुसार पहले हम सभी भारतीय काली स्याही का ही प्रयोग करते थे और यह हमें अच्छे से दिखती थी क्योंकि हमारी आँखों की पुतलियों का रंग ज़्यादातर काला (Dark Brown) होता है। आँखें प्रकाश के सिद्धान्तों को सबसे अच्छी प्रकार से दर्शाती हैं।

स्याही का रंग काले से नीला हुआ यूरोपियों के शासन में। क्योंकि अंग्रेज़ों की पुतलियों का रंग अधिकतर नीला होता था अतः वह नीली स्याही का प्रयोग करते थे जिससे उन्हें अच्छे से दिखायी देता था। शनैः-शनैः हम सभी ने उनके ही रंग को अपना लिया।

हम ज्यादातर लिखने के लिए नीली स्याही वाले पेन का उपयोग क्यों करते हैं, जबकि काली स्याही सफेद कागज के लिए बेहतर रूपांतरण का कार्य करती है?

स्याही का सबसे पहला उपयोग विद्यालयों में होता था और विद्यालय आङ्ग्ल शिक्षा के स्रोत थे जिस कारण उन पर नियन्त्रण भी अंग्रेज़ों का ही होता था। कई विद्यालयों में अभी भी केवल नीली स्याही के प्रयोग की ही अनुमति है। हमारे मन मस्तिष्क में नीली स्याही ही बैठ गई कि कागज़ पर लिखाई तो इसी से होती है परन्तु सत्य यही है कि हम भारतीयों की आँखों को काली स्याही अधिक अच्छी प्रकार से दिखायी देती है।

सबसे पहले काली स्याही कम उपयोग क्यों कि जाती है, जानने के लिए नीचे दिए फॉर्म पर नज़र डालिए –

अब बताइये की ऊपर दिया फॉर्म फोटोकॉपी है या फिर फॉर्म पर काली पेन से हस्ताक्षर किए गए है? ये बता पाना बहुत मुश्किल है। यही मुख्य कारण है की काली स्याही कम उपयोग की जाती है क्योंकि हमारी ज्यादातर प्रिंटिंग काले रंग से की जाती है। इसलिए प्रिंटेड पेपर पर किसी अन्य रंग की स्याही उपयोग करके बड़ी आसानी से अंतर पता किया जा सकता है कि किस जगह पर पेन चलाया गया है।

लेकिन मुख्य सवाल है नीला रंग ही क्यों ज्यादा उपयोग किया जाता है। इसका कारण मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक है। यदि आप रंगों को उनकी आवृत्ति/तरगधेर्य के आधार पर उन्हें बाटें जैसे नीचे चित्र में दिया है।


तो यहाँ देख सकते है कि लाल रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे ज्यादा है अर्थात यह बड़ी आसानी से दूर से भी देखा जा सकता है। लेकिन ज्यादा देर तक इतनी तरंगदैर्ध्य वाले रंग देखना आपकी आंखों के लिए परेशानी हो सकती है। इसलिए ज्यादा तरंगदैर्ध्य के रंगों का उपयोग हम सामान्यतः स्याही या पेन में नही करते। यही कारण है टीचर हमेसा लाल रंग का उपयोग करते है क्योंकि ये बहुत आसानी से नज़र आता है। लेकिन कभी ध्यान दिया वह जो गोला बनाते है वह हमारी आंखों में कितना चुभता है हाहा।

ज्यादा देर तक किसी रंग के संपर्क में रहना है तो कम तरंगदैर्ध्य वाला रंग सबसे अच्छा है। अब सबसे कम तरंगदैर्ध्य के रंग हमारे पास है – बैंगनी, जामुनी और नीला। यहाँ हम बैंगनी और जामुनी न उपयोग करके नीला रंग उपयोग करते है। इसका कारण मनोवैज्ञानिक है।

मनोविज्ञान के अनुसार नीला रंग काफी देर तक आपको जोड़े रखने में सबसे कारगर है।[3] ये आपके अंदर का तनाव कम करता है और एकाग्रता को बढ़ाता है। नीला रंग विश्वास का भी प्रतीक है। कभी आपने ध्यान दिया कि सोशल नेटवर्क वेबसाइट (फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन) में नीला रंग ही क्यों उपयोग होता है क्योंकि वह चाहते है कि आप उनसे घण्टों एकाग्रता से जुड़ें रहे। वही दूसरी कंपनियां इस रंग का उपयोग वहाँ करती है जहां उन्हें अपने कस्टमर्स से विश्वास पाना है।

चूंकि नीला रंग विश्वास, एकाग्रता, लंबे समय तक जोड़े रखने में कारगर और कम तरंगदैर्ध्य के कारण आंखों के लिए बेहतर है। इसलिए नीले रंग की स्याही, पेन के लिए भी उत्तम है।