खंडहर हुए भवनों में चल रही है दुकाने बारिश में हो सकता है गंभीर हादसा, 20 रू की किरायेदारी पर बनाए हुए है ठिकाना

जबलपुर। शहर की घनी आबादी के बीच खड़े जर्जर भवन हादसों को न्योता दे रहे हैं। सराफा में छोटे महावीर मंदिर के पीछे कृष्णा मेडिकल के बगल में खंडहर की शक्ल ले चुके हैं। दशकों पुराने इन भवनों की मियाद पूरी हो चुकी है। उनके कई हिस्से आएदिन टूटकर गिरते रहते हैं। 

बारिश का मौसम में इन भवनों के आस-पास रह रहे लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। बावजूद इससे बेफिक्र होकर निहित स्वार्थों में कुछ लोग इन्हें ही ठिकाना बनाए हुए है। नगर पालिका प्रशासन इनसे गृहकर व जलकर भी वसूल करता है। सिर्फ टैक्स वसूली से मतलब रखने वाला नगर पालिका प्रशासन जर्जर भवनों को जान-माल के लिए खतरनाक तो मानता है, मगर भवन को ध्वस्त करने का अधिकार नगर निगम के पास नहीं है।

इस भवनों की हालत ऐसी है, जिसे देखकर ही डर लगता है। उनकी छत और बरामदे की ईंट टूटकर नीचे गिर रही हैं। दीवारें फट चुकी हैं। कई का एक सिरा खंडहर हो चुका है। ये भवन कभी भी धराशायी हो सकते हैं। बावजूद इससे बेफिक्र होकर निहित स्वार्थों में कुछ लोग इन्हें ही ठिकाना बनाए हुए है।

 

 

इन भवनों के नीचे दुकान खोल रखी है जानकारों के मुताबिक इन दुकानो का किराया 20 रुपया महीना है। जब हमने इन दुकानदारों से इस भवन का जिक्र किया तो बोले – “हम अंदर से मजबूत है” और फिर हमें दिखाया दुकान में लोहे के खम्बे से सपोर्ट देकर काम चल रहा था।

 

 

वैसे ऐसे भवन ज्यादातर विवादित ही होते हैं, लिहाजा उन पर कार्रवाई नहीं हो पाती। फिलहाल, एहतियात के तौर पर जल्द ही अभियान चलाकर ऐसे भवनों को ध्वस्त करा देना ही हितकर रहेगा। कई घटनाओं के बावजूद जिम्मेदार बेपरवाह हैं।

 

 

जानकारों की मने तो खंहडर पड़े भवन को ध्वस्त कराने के लिए काफी बार प्रयास किए गए लेकिन दुकान खाली न होने के कारण भवन ध्वस्त करने में दिक्कत आ रही है। ऐसे में किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है। आए दिन भवन का हिस्सा गिरता रहता है। इन भवनों के पास से गुजरने में डर लगता है। यदि समय रहते भवन को ध्वस्त नहीं कराया गया तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।

इनका है ये कहना

अभी दिखवाता हूँ नोटिस दिया गया है की नहीं – अनूप कुमार सिंह , नगर निगम आयुक्त जबलपुर