चुनाव प्रचार में अंधाधुंध फायरिंग में प्रचार कर रहे प्रत्याशी और समर्थक की गोली मार कर हत्या

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में शनिवार को जनता दल राष्ट्रवादी पार्टी के शिवहर से प्रत्याशी नारायण सिंह और उनके एक समर्थक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना उस वक्त की है, जब प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ चुनाव प्रचार में निकले हुए थे। वहीं प्रत्याशी के समर्थकों ने एक हत्यारे को मौके पर ही दबोच लिया, जिसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।

इस मामले में दो हमलावरों को गिरफ्तार किया गया है। नारायण राजद के जिला उपाध्यक्ष थे। इस बार उन्हें उम्मीद थी कि शिवहर से राजद का उम्मीदवार बनाया जाएगा, लेकिन उनको टिकट नहीं मिला। गुस्से में नारायण सिंह ने पार्टी छोड़ दी और जनता दल राष्ट्रवादी में शामिल हो गए।

बता दें कि नारायण सिंह पर दो दर्जन से ज्यादा केस दर्ज हैं। वो शिवहर के नया गांव के निवासी थे। वो नयागांव पंचायत के मुखिया और डुमरी कटसरी से जिला परिषद के सदस्य भी रह चुके थे। आ‌र्म्स एक्ट के मामले में वह सजायाफ्ता भी रहे। हालांकि आ‌र्म्स एक्ट के मामले में वह बाद में दोषमुक्त भी कर दिए गए।

एक दर्जन अन्य मामलों में भी उन्हें बरी कर दिया गया। तत्काल शिवहर में हत्या और आ‌र्म्स एक्ट के आधा दर्जन मामले चल रहे है जो कोर्ट में लंबित है। मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना में बैरिया बस पड़ाव के विवाद में हुई कुंदन सिंह हत्याकांड में भी वह आरोपी थे।

नारायण सिंह मूल रूप से डुमरी कटसरी प्रखंड के नयागांव के रहने वाले थे। वह वर्ष 2001 से 2011 तक नयागांव पंचायत से लगातार दस साल तक मुखिया रहे। 2016 में वह शिवहर जेल से ही जिला पार्षद चुने गए। जबकि, अपनी मां चंद्रकला देवी को पंचायत का मुखिया बनाया। आ‌र्म्स एक्ट में सजा मिलने के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया।

इसके बाद हुए उपचुनाव में उनके भतीजे नवनीत कुमार जिला पार्षद चुने गए। जून 2018 में वह कोर्ट से दोषमुक्त किए गए। इसके बाद उन्होंने राजद की सदस्यता हासिल की। राजद में उन्हें जिला उपाध्यक्ष बनाया गया। वह शिवहर सीट से राजद के टिकट के दावेदार थे। राजद ने टिकट नही दिया तो उन्होंने जनता दल राष्ट्रवादी का दामन था और शिवहर के मैदान में कूद पड़े। नारायण सिंह के परिवार में पिता यमुना सिंह, मां चंद्रकला देवी, पत्नी सुषमा नारायण, पुत्र आदित्य नारायण और पुत्री दीपा कुमारी है।