उच्च शिक्षा का बुनियादी ढांचा सुधारने के लिए केंद्र सरकार प्रयासरत

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सरकार ने देश में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुधारने की दिशा में क्रांतिकारी फैसला लिया है. कैबिनट ने 2022 तक उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए उच्च शिक्षा वित्त एजेंसी यानि हेफा के कार्य विस्तार को मंजूरी प्रदान कर दी. जिससे उच्च शिक्षा का बुनियादी ढांचा सुधरेगा.

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार 2022 तक शिक्षा के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह बदलने और उसकी प्रणालियों को मजबूत करने के लिए तेजी से काम कर रही है. इसके लिए सरकार ने इस साल करीब 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया है. कैबिनट ने 2022 तक उच्‍च शिक्षा के बुनियादी ढांचे की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए उच्च शिक्षा वित्त एजेंसी यानि हेफा के कार्य विस्तार को मंजूरी प्रदान कर दी. हेफा के पूंजी आधार को बढ़ाकर 10,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है. सरकार ने देश में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुधारने की दिशा में इसे क्रांतिकारी फैसला करार दिया है.

केंद्र सरकार ने 31 मई, 2017 को एचईएफए यानि हेफा की स्‍थापना की थी. यह एक गैर-लाभकारी, गैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी है, जो केंद्र सरकार के अंतर्गत उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए गैर-बजटीय संसाधन जुटाता है.

सरकार के फैसले से हेफा बाजार से अतिरिक्‍त संसाधन जुटा सकेगा और इसका उपयोग संस्‍थानों की आवश्‍यकताओं को वित्‍तीय सहायता देने के लिए किया जाएगा. फैसले से होने वाले फायदे गिनाते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा का बुनियादी ढांचा सुधरेगा, शोध की गुणवत्ता बढ़ेगी, देश से प्रतिभा पलायन रुकेगा, छात्रों के लिए अच्छे शिक्षक मिलेंगे और छात्रों की छात्रवृत्ति ज्यादा मिल सकेगी.

सरकार का कहना है कि इस साल के बजट में शिक्षा के लिए 85 हजार करोड़ का बजट दिया गया है, जबकि 25 हजार करोड़ रुपये और दिए जा रहे हैं. कुल मिलाकर ये रकम एक लाख दस हजार करोड़ के करीब है. ये रकम 2013-14 के यूपीए राज के मुकाबले 70 फीसदी ज्यादा है.