सीमैप किसान मेला-2017, महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

लखनऊः किसानों ओर उद्यमियों में नव विकसित प्रौद्योगिकियों, उन्नत प्रजातियों और सेवाओं के प्रचार-प्रसार के मुख्य उद्देष्य से सीएसआईआर-सीमैप विगत लगभग 13 वर्षों से लगातार किसान मेले का आयोजन करता आ रहा है । विगत वर्षों की भाँति इस वर्ष भी सी.एस.आई.आर.-केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सी.एस.आई.आर-सीमैप) द्वारा लखनऊ स्थित कैम्पस में एक दिवसीय किसान मेला का आयोजन किया गया।

किसान मेले का मुख्य समारोह अपरान्ह 10.30 बजे पूर्वान्ह आयोजित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि डा. पंजाब सिंह, अध्यक्ष राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी व पर्व महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् थे। श्री अरूण तिवारी पूर्व प्रोग्राम डायरेक्टर डीआरडीओ एवं उ.प्र. के कृषि उत्पादन आयुक्त, श्री प्रदीप भटनागर, किसान मेले में विषिष्ट अतिथि थे। इस अवसर पर ब़ड़ी संख्या में वरिष्ठ वैज्ञानिक, अधिकारी गण एवं उद्योगों के प्रतिनिधि तथा किसान उपस्थित थे।

इस अवसर पर आईएचबीटी, पालमपुर के निदेशक डा. संजय कुमार, एन.ब.ी.आर.आई. के निदेषक डा. एस. के. बारिक, डा. आलोक धवन, निदेशक, आईआईटीआर व निदेशक, उद्यान उत्तर प्रदेश श्री एस. पी. जोशी भी उपस्थित थे। इस मेले में देश के विभिन्न राज्यों जैसे कि उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, झारखण्ड उड़ीसा, आंध्र प्रदेश तथा अन्य प्रदेशांे से आये लगभग छः हजार कृषकों और उद्यमियों ने भाग लिया । इस अवसर पर सीएसआईआर की विभिन्न प्रयोगशालाओं ने अपने स्टाॅल लगाकर उन्नत प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया। सीमैप द्वारा प्रशिक्षित महिलाओं ने भी अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया जिसमें आगन्तुकों ने अपनी विशेष रूचि दिखाई।

किसान मेला में औषधीय एवं सगंध पौधों पर ‘उत्पादन से बाजार तक‘: परिचर्चा गोष्ठी, उन्नत पौध सामग्री व प्रकाशनों का विक्रय, नीबूघास एवं आर्टीमिसिया की नई प्रजातियों का विमोचन, उन्नत किस्मों, सीमैप प्रोडक्ट्स का प्रदर्शन, आसवन/प्रसंस्करण का सजीव प्रदर्शन, अगरबत्ती व गुलाब जल बनाने का प्रशिक्षण, मेन्था की अगेती कृषि तकनीकी का प्रदर्शन, औस फसलों का परम्परागत फसल प्रणाली में समावेष का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सीमैप द्वारा विकसित एक लघु उन्नत आसवन इकाई जिसके द्वारा सुगंध फसलों व पानी में घुलनशील सुगंध तेलों का आसवन किया जा सकेगा, का भी प्रदर्शन किया गया।

इस मेले के मुख्य अतिथि डा. पंजाब सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि किसान भाई सीमैप द्वारा विकसित उन्नत तकनीकी और औषधीय एवं सगंध पौधों की किस्में उगाकर अधिक आमदनी अर्जित करने के साथ देश में रोजगार के अतिरिक्त साधन भी पैदाकर सकते है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल उद्योगों के लिए कच्चे माल की मांग आपूर्ति होगी बल्कि किसानों के जीवन स्तर में भी सुधार होगा। डा. पंजाब सिंह ने जैव विविधता संरक्षण व खेती के लिये संसाधनों के समुचित उपयोग पर विषेष बल दिया।

विशिष्ट अतिथि कृषि उत्पादन आयुक्त, उ. प्र. श्री प्रदीप भटनागर ने मेन्था के अतिरिक्त हल्दी, स्टीविया, इसबगोल इत्यादि औषधीय पौधों की खेती बढ़ाने की सलाह दी। प्रो. अरूण तिवारी ने हर्बल उत्पादों में प्रमाणित वनस्पतियों की चर्चा करते हुये कहा कि इन प्रोडक्ट्स में रसायनों के प्रयोग नही किये जाने चाहिए। उन्होनें औषधीय एवं सगंध पौधों की प्रोसेसिंग कर उन्हें बाजार में उतारने पर जोर दिया।

मेले में विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधि जैसे इपका लैब, जिन्दल ड्रग्स एसेन्सियल आॅयल एसोसिएषन आॅफ इंडिया, एफएफडीसी, कन्नौज, बायोटेक पार्क, आर्षी इसेन्षियल आॅयल्स् इत्यादि तथा विभिन्न औषधीय एवं सगंध फसलों के प्रमुख क्रेता व विक्रेता उपस्थित रहे और परिचर्चा में भाग लिया।

इस अवसर पर तुलसी की एक उन्नत प्रजाति का भी विमोचन मुख्य अतिथि द्वारा किया गया तथा प्रकाषित स्मारिका ‘औस ज्ञान्या‘ भी किसानों के लाभार्थ जारी की गई। प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी, निदेशक, सीएसआईआर-सीमैप ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि किसानों तथा अतिथियों स्वागत किया एवं कहा कि सीएसआईआर द्वारा सीमैप को औषधीय एवं सगंध पौधों की नवीन प्रजातियाँ एवं खेती करने के उन्नत तरीकों की जानकारी के प्रसार के लिये देष में एक वृहत स्तर पर कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

इसी संदर्भ में सीएसआईआर के ‘एरोमा मिशन‘ मे सीएसआईआर की कई संस्थायें मिलकर कार्य करेगी। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि सीमैप के वैज्ञानिकों ने ग्रामीण विकास कायक्रम के अन्तर्गत बुन्देलखण्ड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों, कक्ष गुजरात के लवण प्रभावित क्षेत्र व तमिलनाडु के सुनामी प्रभावित क्षेत्र में वहां के लिये उपयुक्त संगधीय फसलों का प्रदर्शन किया है। जिसके बडे ही उत्साह वर्धक परिणाम सामने आये हैं।

इस अवसर पर प्रगथी इंटरनेशनल, बंगलोर के साथ सीमैप द्वारा माॅस्क्यूटो रिपेलेन्ट अगरबत्ती एवं स्प्रे बनाने हेतु एक अनुबंध पर हस्ताक्षर भी किया गया। डा. आलोक कालरा, अध्यक्ष, आयोजन समिति ने मेले के बारे में बताया और डा. संजय कुमार, संयोजक ने कार्यक्रम का संचालन किया।

तुलसी की नई प्रजाति जारी
सीमैप किसान मेला के अवसर पर सीमैप द्वारा नव विकसित ‘सिम-स्निग्धा‘ नामक आॅसिमम वैसीलिकम (तुलसी) की नई प्रजाति जारी की गई। इस प्रजाति के तेल में 78 प्रतिषत से अधिक मिथाइल सिन्नामेट पाया जाता है जिसका उपयोग एरोमा, फार्मास्यिूटिकल और कास्मेटिक उद्योग में बहुतायत से होता है। कम अवधि की फसल होने के कारण इसे मौजूदा फसल चक्र में भी भली-भांति समायोजित किया जा सकता है।