स्वच्छ भारत मिशन: आगे की राह
उमाकांत लखेड़ा लेखक नई दिल्ली स्थित स्वतंत्र वरिष्ठ पत्रकार हैं। इस लेख में व्यक्त विचार स्वयं लेखक के हैं।

हात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका में बिताए वर्षों में दो घटनाएं साफ तौर पर प्रभावित करती हैं। पहली, वह नस्लीय भेदभाव जिसका उन्हें ट्रेन के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में सामना करना पड़ा, जब उन्‍हें एक असभ्य यूरोपियन नागरिक द्वारा उनके सवालों से तंग आकर पीटरमैरिट्सबर्ग स्टेशन पर ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया था।

और, दूसरी घटना साफ-सफाई और स्वच्छता से संबंधित है। जब गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका के गरीब काले पुरुषों को दूसरों के शौचालय की सफाई और उनके मलमूत्र को सिर पर बाल्टी में ले जाते देखा तो उन्हें आंतरिक दु:ख हुआ। इस छोटी सी घटना ने उनकी अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया। इसी दिन गांधी जी ने प्रतिज्ञा की कि वे अपने शौचालय की सफाई खुद करेंगे। उन्होंने अपने व्रत को मन में दोहराते हुए प्रतिज्ञा की, “यदि हम अपने शरीर को खुद साफ नहीं रख सकते तो हमें अपने स्वराज से बेईमानी एक दुर्गंध की तरह होगा।”

गांधी जी के इन्हीं साफ-सफाई से संबंधित आदर्शों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गांधी जी की जयंती 2 अक्टूबर 2014 को “स्वच्छ भारत मिशन ” की शुरूआत करने के लिए चुना। प्रधानमंत्री जी का स्वच्छ भारत के प्रति दृष्टिकोण और विचार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के “दुर्गंध-मुक्त स्वराज ” के प्रति ही बढ़ा एक और कदम है। यह मिशन, जो केंद्र सरकार के विशालतम स्वच्छता कार्यक्रम का हिस्सा है, को शहरी तथा ग्रामीण घटकों में विभाजित किया गया है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य महात्मा गांधी की 150वीं जयंती 2 अक्टूबर 2019 तक भारत को स्वच्छ बनाना है।

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की कमान शहरी विकास मंत्रालय को दी गई है और 4041 वैधानिक कस्बों में रहने वाले 377 लाख व्‍यक्तियों तक स्वच्छता हेतु घर में शौचालय की सुविधा प्रदान करने का काम सौंपा गया है। इसमें पांच वर्षों में करीब 62009 करोड़ रूपये व्यय का अनुमान है जिसमें केन्द्र सरकार 14623 करोड़ रूपये की राशि सहायता के तौर पर उपलब्ध करायेगी। इस मिशन के अंतर्गत 1.04 करोड़ घरों को लाना है जिसके तहत 2.5 लाख सामुदायिक शौचालय सीटें उपलब्ध कराना, 2.6 लाख सार्वजनिक शौचालय सीटें उपलब्ध कराना तथा सभी शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधा मुहैया करना है।

इस मिशन के 6 प्रमुख घटक हैं-

1. व्यक्तिगत घरेलू शौचालय;

2. सामुदायिक शौचालय;

3. सार्वजनिक शौचालय;

4. नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन;

5. सूचना और शिक्षित संचार (आईईसी) और सार्वजनिक जागरूकता;

6. क्षमता निर्माण

शहरी मिशन के तहत खुले में शौच को समाप्त करना; अस्वास्थ्यकर शौचालयों को फ्लश शौचालयों में परिवर्तित करना; और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधा का विकास करना है। इस मिशन के तहत लोगों को खुले में शौच के हानिकारक प्रभावों, बिखरे कचरे से पर्यावरण को होने वाले खतरों आदि के बारे में शिक्षित कर उनके व्यवहार में परिवर्तन लाने पर विशेष जोर दिया जाता है। इन उद्देश्यों को पूरा करने में शहरी स्थानीय निकायों का बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है तथा साथ ही इसमें निजी क्षेत्र की भी भागीदारी ली जा सकती है।

ग्रामीण मिशन, जिसे स्वच्छ भारत ग्रामीण के नाम से जाना जाता है, का उद्देश्य 2 अक्टूबर 2019 तक खुले में शौच से ग्राम पंचायतों को मुक्त करना है। इस मिशन की सफलता के लिए गांवों में व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी से क्लस्टर और सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करना भी है।

गांव के स्कूलों में गन्दगी और मैली की स्थिति को देखते हुए, इस कार्यक्रम के तहत स्कूलों में बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं के साथ शौचालयों के निर्माण पर विशेष जोर दिया जाता है। सभी ग्राम पंचायतों में आंगनबाड़ी शौचालय और ठोस तथा तरल कचरे का प्रबंधन इस मिशन की प्रमुख विषय-वस्तु है। नोडल एजेंसियां ग्राम पंचायत और घरेलू स्तर पर शौचालय के निर्माण और उपयोग की निगरानी करेंगी। ग्रामीण मिशन के तहत 134000 करोड़ रूपये की लागत से 11.11 करोड़ शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है।

व्यक्तिगत घरेलू शौचालय के प्रावधान के तहत, बीपीएल और एपीएल वर्ग के ग्रामीणों को केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा प्रत्येक शौचालय के लिए क्रमश: 9000 रुपये और 3000 रुपये का प्रोत्साहन -निर्माण और उपयोग के बाद- दिया जाता है। उत्तर-पूर्व के राज्यों, जम्मू-कश्मीर तथा विशेष श्रेणी के क्षेत्रों के लिए यह प्रोत्साहन राशि क्रमश: 10800 रुपये और 1200 रुपये है।

कार्यान्वयन की नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है, परिणाम उम्मीद से अधिक हैं। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2014-15 में 5854987 शौचालयों का निर्माण किया गया जबकि लक्ष्य 50 लाख शौचालयों का ही था। इसमें लक्ष्य के 117 प्रतिशत तक सफलता हासिल हुआ है। 2015-16 में 127.41 लाख शौचालयों का निर्माण किया गया है जो लक्ष्य 120 लाख से ज्यादा है। 2016-17 में लक्ष्य 1.5 करोड़ रखा गया और इसमें 1 अगस्त 2016 तक 3319451 शौचालयों का निर्माण पूरा कर लिया गया है तथा बाकी के लिए भी तेजी से काम चल रहा है।

ग्रामीण मिशन के तहत 1 अक्टूबर 2014 से 1 अगस्त 2016 तक 210.09 लाख शौचालयों का निर्माण किया गया है। इसी अवधि में स्वच्छता का दायरा 42.05 प्रतिशत से बढ़कर 53.60 प्रतिशत तक पहुंच गया है। हालांकि, अंत में, स्वच्छता की कार्यप्रणाली में क्या व्यवहारिक परिवर्तन हुआ है यही मायने रखता है। यह जिलाधिकारियों, सीईओ, जिला पंचायत तथा जिला पंचायत के अध्यक्षों के संयुक्त प्रयासों का प्रतिफल होता है। इस सफाई अभियान से संबंधित राज्य स्तरीय कार्यशालाओं द्वारा अलग-अलग राज्यों में कार्य किया जा रहा है।

अंत में यह कि प्रधानमंत्री भी स्वच्छ भारत मिशन की सफलता के लिए मजबूती से इसके पीछे खड़े हैं। केन्द्र और राज्यों के बीच समन्वय उसके प्रतिनिधियों के राज्यों का दौरा करने और समन्वय बैठकों में भाग लेने से बढ़ा है। अंतत: हम कह सकते हैं कि स्वच्छ भारत मिशन सही रास्ते पर अग्रसर है।