तीरंदाजी के प्रतिभावानों को प्रशिक्षण देकर राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए बनाये योग्य-जिलाधिकारी

सोनभद्र@ सोनभद्र जिले के नागरिकों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लिहाजा दूर-दराज आदिवासी, बाहुल्य क्षेत्रों में छिपी हुई तीरंदाजी की प्रतिभाओं को खोजा जाय और प्रशिक्षण देकर राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिताओं के योग्य बनाये जाय।
उक्त बातें जिलाधिकारी श्री प्रमोद कुमार उपाध्याय ने सोमवार को दो-दो लागत की तीन विदेशी तीर व धनुष राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रतिभावान बच्चों को कलेक्ट्रेट मीटिंग हाल में प्रदान करते हुए कहीं।

जिलाधिकारी ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि प्रदेश में मात्र सोनभद्र जिले के विशिष्ट स्टेडियम को राष्ट्र स्तरीय तीरंदाजी प्रशिक्षण का केन्द्र बनाया गया है और जिनके प्रशिक्षण हेतु हास्टल के माध्यम से पूरी सुगमता के साथ अन्तर्राष्ट्रीय स्तरीय तीरंदाजी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि तीरंदाजी के राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण के लिए विदेशी तीर-धनुष की कोई कमी नहीं होगी, सिर्फ जरूरत है तीरंदाजी के प्रतिभावान बच्चों में छिपी हुई प्रतिभा को खोजने की। इस मौके पर अपर जिलाधिकारी श्री उमाकान्त त्रिपाठी ने कहा कि सोनभद्र के तीरंदाजी के बच्चें राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के पदक प्राप्त कर चुके हैं, लिहाजा राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के गौरव प्राप्त करने के लिए बच्चों को तीरंदाजी के प्रशिक्षण को बहुत ही तत्परता से दिया जाय, ताकि हर साल राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के तीरंदाजी के बच्चे सोनभद्र जिला राष्ट्र को प्रदान करता रहें।

जिला खेल अधिकारी श्री अनिल तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि 6 लाख रूपये की लागत के तीन विदेशी तीर-धनुष प्राप्त होने के उपरान्त अब विशिष्ट स्टेडियम तियरा में 15 विदेशी धनुष की क्षमता हो गयी है।