ब्राह्मण नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी में कांग्रेस

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भोपाल | लंबे समय तक प्रदेश कांग्रेस में ब्राह्मण नेताओं का दबदवा रहा है, लेकिन अब स्थिति इसके ठीक उलट हो गई है। उस समय पार्टी में इस वर्ग के नेता निर्णायक भूमिका में होते थे, लेकिन अब, बीते कुछ समय से ब्राह्मण नेता या तो नेपथ्य में चले गए या घर बिठा दिए गए हैं। इसके चलते हालात यह हो गए हैं कि अब कांग्रेस में पूरी तरह से ब्राह्मण नेताओं का अकाल नजर आने लगा है।

खास बात यह है कि प्रदेश में डेढ़ दशक की सत्ता के दौरान भाजपा पूरी तरह से पिछड़े वर्ग की राजनीति करती रही है, लेकिन अब भाजपा संगठन ने प्रदेश में पार्टी की पूरी कमान ब्राह्मण नेताओं को दे दी है। भाजपा के इस दांव से अब कांग्रेस के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। यही वजह है कि अब कांग्रेस पार्टी में इस वर्ग के चेहरों की तलाश कर उन्हें सत्ता व संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी करने को मजबूर नजर आने लगी है।

सत्ता जाते ही हुआ भाजपा में परिवर्तन
प्रदेश में तेरह सालों तक सत्ता की कमान संभालने वाले शिवराज सिंह चौहान सरकार की सत्ता जाते ही भाजपा संगठन पहले ही नेता प्रतिपक्ष की जवाबदारी बुंदेलखंड के कद्दावर ब्राह्मण नेता गोपाल भागर्व को दे चुकी है। इसके बाद हाल ही में राकेश सिंह के स्थान पर विष्णुदत्त शर्मा को प्रदेश संगठन की कमान सौंप दी गई है। राजनीतिक पंडित इस परिवर्तन का विश्लेषण कर रहे हैं कि इससे किसे फायदा और किसे नुकसान होगा।

पिछड़े वर्ग को साधने के प्रयास शुरू
दोनों आला पदों की कमान ब्राह्मण नेताओं को देने के बाद पार्टी स्तर पर पिछड़ा वर्ग को साधने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। इस वर्ग को खुश करने के लिए गोपाल भार्गव को नेता प्रतिपक्ष से हटा कर शिवराज सिंह चौहान या पिछड़े वर्ग के किसी अन्य को यह जवाबदारी सौंपे जाने की चर्चा है, लेकिन भाजपा को ऐसा करने से ब्राह्मण वर्ग के नाराज होने का खतरा नजर आ रहा है। यही वजह है कि अब दूसरे विकल्प के तौर पर शिवराज सिंह को राज्यसभा में लेकर केंद्रीय मंत्री बनाए जाने की भी अटकलें हैं।
इसी तरह से राकेश ङ्क्षसह को भी मंत्री या केंद्रीय कमेटी में जवाबदारी देने की चचार्एं हैं।

कांग्रेस में ब्राह्मण नेताओं का लंबा सफर
कांग्रेस की राजनीति में ब्राह्मण नेताओं पर नजर डाले तो पहले शुक्ल बंधु, डीपी मिश्रा और इसके बाद श्रीनिवास तिवारी मुख्य भूमिका में रह चुके हैं। इसके बाद सुरेश पचौरी, सत्यव्रत चतुवेर्दी, बालेंदु श्ुाक्ल, सत्यदेव कटारे आदि का दौर रहा है। चौधरी राकेश सिंह चतुवेर्दी एवं प्रतापभानु शर्मा जैसे नेता भी कुछ समय प्रमुख भूमिका निभाते थे, लेकिन अब कांग्रेस में ब्राह्मण नेताओं की कमी के हालात हंै। सुरेश पचौरी एवं सत्यव्रत चतुवेर्दी घर बैठ गए हैं। सत्यदेव कटारे अब रहे नहीं और चौधरी भाजपा घूम आए हैं।