तमिलनाडु में सियासी संकट जारी

तमिलनाडु में सत्‍तारूढ़ अन्नाद्रमुक पार्टी के दो गुटों के बीच चल रहे सत्‍ता संघर्ष के कारण राजनीतिक स्थिरता के बादल गहराते जा रहे हैं।
पार्टी महासचिव वी. के. ससिकला ने वरिष्‍ठ नेता ई. मधुसूदनन को पार्टी की प्रधान परिषद के अध्‍यक्ष पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्‍यता से बर्खास्‍त कर दिया है। मधुसूदनन हाल ही में ओ. पन्‍नीरसेल्‍वम के खेमे चले गए थे और शशिकला की गतिविधियों की जोरदार आलोचना की थी।

हालांकि शशिकला को शुक्रवार को एक बड़ी राहत सुप्रीम कोर्ट से मिली, जब कोर्ट ने उन्हें मुख्यमंत्री बनने से रोकने की याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इंकार कर दिया।

उधर, विपक्षी द्रमुक पार्टी के कार्यकारी अध्‍यक्ष एम. के. स्‍टालिन ने शुक्रवार को राजभवन में राज्‍यपाल विद्यासागर राव से मुलाक़ात की। स्टालीन ने राज्‍यपाल से आग्रह किया कि वे संवैधानिक प्रावधानों के तहत सत्‍तारूढ़ पार्टी के दोनों ही गुटों से जल्‍द से जल्‍द सदन में अपना बहुमत सिद्ध करने को कहे।

इस बीच, मद्रास उच्‍च न्‍यायालय में दो बंदी प्रत्‍यक्षीकरण याचिकाएं दाखिल कर दो विधायकों को न्‍यायालय के सामने पेश करने की मांग की गई। सरकारी वकील ने न्‍यायालय में कहा कि सत्‍तारूढ़ पार्टी के किसी भी विधायक पर जोर-जबरदस्‍ती नहीं की जा रही है और उन्‍होंने याचिका का जवाब देने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा। न्‍यायमूर्ति सी टी सेल्‍वम और न्‍यायमूर्ति टी. मथीवनंन की पीठ ने राज्‍य सरकार और पुलिस को नोटिस जारी कर उनका जवाब तलब करने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई को सोमवार तक के लिए टाल दिया। वहीं राज्यपाल ने भी अन्नाद्रमुक विधायकों को कथित तौर पर अवैध रूप से बंधक बनाये जाने की ख़बरों पर रिपोर्ट तलब की।

वहीं तमिलनाडु के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने इससे इनकार किया कि उन्होंने राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर कोई रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय या राष्ट्रपति को भेजी है। राजभवन की ओर से जारी एक विग्यप्ति में कहा गया, तमिलनाडु के राज्यपाल सी विद्यासागर राव ने केंद्रीय गृह मंत्रालय या भारत के राष्ट्रपति को कोई रिपोर्ट नहीं भेजी है जैसा कि कुछ मीडिया द्वारा कहा जा रहा है।