कोरोना काल में सारी इज्जत तो कोरोना ने हर ली

Sudha Srivastava  लिखती है कोरोना काल में सारी इज्जत तो कोरोना ने हर ली है ससुराल में अपनी इज्जत का फालूदा देखना हो तो इस समय जा कर देखो.            

कोरोना काल और ससुराल

कोरोना काल में जब पहुंच गया ससुराल !

बहुत ही अजीब सा था वहां का हाल !!

घर की घंटी बजाते ही सास दौड़ी आई !

देख जमाई को आज, मजबूरी मे मुसकाई !!

बोली थोड़ी देर गेट पर आप ठहर जाओ !

वाश वेशन पर सैनिटाइजर से हाथ धो आओ !!

पढे लिखे हो चेहरे पर मास्क नहीं लगाया ?

घर पर ही रहना था किसी ने नहीं समझाया ??

खैर आ ही गए हो तो दरवाजे पर जूते दो उतार !

पैर धोकर आ जाओ चाय रखी है तैयार !!

मन मे उठा क्रोध पर कुछ कह नहीं पाया !

लगा जैसे जमाई नही, कोई राक्षस ससुराल आया !!

इज्जत तो सारी आज कोरोना ने हर ली !

बाकी की कसर सासू माँ ने पूरी कर ली !!

फिर बेआबरू हो कदम साली की ओर बढाया !

वहां से भी नकारात्मक सा उत्तर आया !!

वो बोली सामाजिक दूरी को समझ नहीं पाये ?

हमारे इतनी पास क्यूँ जीजाजी चले आऐ ??

दूर से ही करती हूँ आज आपको नमस्ते !

छोटे साले ने भी दूर से हाथ हिलाया, हंसते हंसते !!

फिर ससुर जी की मधुर आवाज दी सुनाई !

कवारंटाइन करना रे, बाहर से आया है जमाई !!

चाय हाथ में थी, पर नहीं जा रही थी गटकी !

चाय खत्म होते ही, लगाना चाह रहा था घुडकी !!

जो काम सरकार लोकडाउन मे नहीं कर पाई !

ससुराल वालों ने एक ही दिन में थी समझाई !!

कहता हूँ मै, कोरोना तेरी हो जाये ऐसी तैसी !

दुनिया में नहीं ससुराल किसी की मेरे जैसी !