कश्मीरी पंडितों की वापसी का प्रस्ताव JK विधानपरिषद में पारित

जम्मू-कश्मीर के विधान सभा में कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी को लेकर प्रस्ताव पारित करने के बाद शुक्रवार को राज्य के विधान परिषद् ने भी सर्वसम्मति से इस बारे में प्रस्ताव पारित कर दिया। अब उम्मीद यही है कि प्रस्ताव का सही ढंग से अमल भी होगा और 27 साल बाद ही सही, कश्मीरी पंडितों को न्याय मिल सकेगा।

विस्थापित कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी के लिए अनुकूल माहौल बनाने के मक़सद से गुरुवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित होने के बाद शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर विधान परिषद ने भी इस बारे में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर दिया सभी राजनीतिक दलों ने इसका दिल खोलकर स्वागत किया है।

भारतीय जनता पार्टी के लिए, घाटी में विस्थापितों की वापसी का मुद्दा प्रमुख रहा है। साल 2015 में कश्मीरी विस्थापितों की वापसी और पुनर्वास के लिए, प्रधानमंत्री के विशेष पैकेज के तहत कश्मीरी पंडितों के लिए, वित्तीय सहायता के अलावा 3 हज़ार अतिरिक्त सरकारी नौकरियों की भी व्यवस्था की गई थी।

राज्य में चुनाव से पहले जारी अपने विज़न डॉक्यूमेंट में भाजपा ने भी कश्मीरी पंडितों के लिए इंसाफ़ और सम्मानजनक पुनर्वास प्रक्रिया शुरू करने का वादा किया था। कश्मीरी पंडितों ने भी कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही कहा है कि सब कुछ इस पर निर्भर करेगा कि किस तरह से इसे अमल में लाया जाता है। क्योंकि अभी तक ज़्यादातर दोषियों को सज़ा नहीं मिली है।

यह बात सही है कि प्रस्ताव के अमल पर ही बहुत कुछ निर्भर करेगा लेकिन घाटी से बड़े पैमाने पर कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के 27 सालों बाद उनको और अन्य विस्थापितों को इंसाफ़ दिलाने के लिए एक बड़ा कदम तो ज़रूर उठाया गया है।