सीएसआईआर और नीरी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया ग्रीन पटाखे

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आने वाले वक्त में बाज़ार में ग्रीन पटाखे दिखाई देने लगेंगे, पीईएसओ संस्था ग्रीन पटाखे बनाने वालों को लाइसेंस देगी

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा है कि आने वाले वक्त में बाज़ार में ग्रीन पटाखे मिलने लगेंगे। नई दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि CSIR और नीरी ने कम प्रदूषण करने वाले ग्रीन पटाखों का फर्मूला खोज लिया है। ग्रीन पटाखों के लिए जहां सर्वोच्च न्यायलय ने आदेश दिए है वहीं सरकार भी इसके लिए गंभीर प्रयास शुरू कर चुकी है।

पारंपरिक पटाखों से निकलने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए देश के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे फार्मूले को तैयार किया है जिससे आने वाले वक्त में बच्चे और बड़े दोनों के पास ऐसे पटाखे होंगे जिनसे बहुत कम प्रदूषण होगा।नई दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा कि इन पटाखों को सीएसआईआर और नीरी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है।और पीईएसओ संस्था के द्वारा पटाखे बनाने वालों को इनके बनाने का लाइसेंस दिया जाएगा।

ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों जैसे ही होंगे लेकिन इनके जलने से कम प्रदूषण होता है। ग्रीन पटाखों से सल्फर डाई आक्साइड और पोटेशियम नाइट्रेट के उत्सर्जन में 30 प्रतिशत तक कमी आ जाती है।जिसके चलते पीएम लेवल में भारी कमी आती है।नीरी के मुताबिक फिलहाल प्रमुख रूप से तीन तरह के ग्रीन पटाखे बनाए जा रहे हैं इनमें से कुछ पटाखे जलने के साथ पानी भी पैदा करेंगे। ग्रीन पटाखे इस बार की दीवाली में तो नहीं आ पाएगें लेकिन उम्मीद है कि अगले साल से बाज़ार में ये खूब दिखाई देंगे ।