साइकिल अखिलेश की, मुलायम बोले अखिलेश के खिलाफ लड़ूंगा चुनाव

समाजवादी पार्टी पर हक की लड़ाई में अखिलेश के हाथ जीत लगी है तो मुलायम सिंह को चुनाव आयोग से मायूसी मिली है। पार्टी के नाम और साइकिल चुनाव चिह्न पर अखिलेश यादव का कब्जा होने के बाद राज्य की सियासत में भी नया मोड़ आ गया है। मुलायम अखिलेश के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं, तो इस फ़ैसले के बाद राज्य में नए गठबंधन के समीकरण भी देखने को मिल सकते हैं।

समाजवादी पार्टी में पिछले कुछ महीनों से जारी दंगल में बेटा, बाप पर भारी पड़ गया है। समाजवादी पार्टी पर कब्जे को लेकर चुनाव आयोग में जारी समाजवादी पार्टी की लड़ाई में बाजी अखिलेश गुट के हाथ लगी है ।

दोनों पक्षों की ओर से तमाम दलीलें सुनने के बाद शुक्रवार को चुनाव आयोग ने जो फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था उसे सोमवार को सुनाया और समाजवादी पार्टी को अखिलेश यादव के हवाले कर दिया। आयोग के फ़ैसले के अनुसार साइकिल चुनाव निशान अखिलेश खेमे के पास ही रहेगा। फ़ैसले से अखिलेश पक्ष में खुशी तो लाजमी ही थी।

वहीं इस फ़ैसले से मुलायम सिंह यादव खेमे को निराशा मिली है। गौरतलब है कि मुलायम बार-बार ये दावा कर रहे थे कि असली समाजवादी पार्टी उन्हीं की है। मुलायम खेमा इस फ़ैसले को कोर्ट ले जाने की तैयारी में है।

पहले ये कहा जा रहा था कि अगर साइकिल चुनाव चिह्न जब्त हुआ तो यूपी चुनाव में दोनों ही खेमों को गंभीर नुकसान होगा क्योंकि अगर नया चुनाव निशान जारी होता तो उसे जनता के बीच इतनी जल्दी ले जाना आसान नहीं होता।

चुनाव आयोग के फ़ैसले के बाद बाप बेटे के बीच अलग-अलग मुक़ाबला अब लगभग तय है। मुलायम सिंह यादव ने भी अब लगभग मान लिया है कि पिता-पुत्र के बीच के ‘संघर्ष विराम की सारी कोशिशें नाकाम हो गई हैं। फ़ैसला आने से पहले दिन में ही मुलायम ने साफ कर दिया कि वो अखिलेश से दो दो हाथ करने को तैयार हैं। अखिलेश मुसलमानों के प्रति नकारात्मक रवैया रखते हैं। अखिलेश सपा से निष्कासित रामगोपाल यादव के हाथों में बीजेपी जैसी साम्प्रदायिक पार्टी के इशारे पर खेले जा रहे हैं। मैं मुसलमानों के लिये जिऊंगा और उन्हीं के लिए मर भी जाऊंगा। अगर मुसलमानों के हितों के संरक्षण की बात हुई तो मैं अपने बेटे के ख़िलाफ़ भी लड़ूंगा।

समाजवादी पार्टी के लखनऊ कार्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मुलायम सिंह ने कहा कि बेटा उनकी बात नहीं सुनता। उन्होंने कहा मैंने अखिलेश को तीन बार बुलाया पर वह एक मिनट के लिए आए और मेरी बात सुने बिना चले गए। अखिलेश मेरी बात नहीं सुन रहे हैं। अखिलेश को आज भी मैंने बुलाया था लेकिन वह नहीं आए। वह अब बार-बार बुलाने पर भी नहीं आते हैं। सभी कार्यकर्ता मेरा साथ दें।

इस बीच लखनऊ में सपा दफ्तर पर कब्जे की जंग जारी है। अखिलेश गुट ने पार्टी ऑफिस पर कब्ज़ा करते हुए अखिलेश यादव के नाम का राष्ट्रीय अध्यक्ष का बोर्ड लगा दिया है। इससे पहले मुलायम का बोर्ड लगा हुआ था। अब मुलायम की नेम प्लेट के ठीक नीचे अखिलेश का नया बोर्ड लगा दिया गया है।