प्रधानमंत्री मोदी के प्रस्तावक रहे काशी के डोम राजा का निधन, पीएम मोदी और योगी ने जताया दुख
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वाराणसी : डोम राजा जगदीश चौधरी का मंगलवार की सुबह निधन हो गया। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा उम्मीदवारी के प्रस्तावक भी बने। इस बीच उनके निधन का समाचार सुनकर पीएम मोदी और सीएम योगी ने भी टि्वट कर दुख जताया। इस बीच परिवार का दुख बांटने योगी के मंत्री नीलकठ तिवारी डोम राजा के घर गए। उन्होंने परिवार से मुलाकात कर हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

वाराणसी से दूसरी बार नामांकन भरने वाले मोदी के प्रस्तावकों में डोम राजा जगदीश चौधरी भी शामिल थे। वाराणसी के निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। जांघ में घाव के कारण कई महीनों से उनका इलाज चल रहा था। निधन की खबर मिलते ही उनके त्रिपुरा भैरवी घाट स्थित निवास पर लोगों की भीड़ जुट गई।

लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जगदीश चौधरी को अपना प्रस्तावक चुना था। वाराणसी में अंतिम संस्कार मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर होता है। दोनों घाटों पर अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी डोम समाज के पास है। काशी में इस प्रमुख जिम्मेदारी को निभाने के कारण इन्हें डोम राजा कहा जाता है।

पीएम ने कहा- सनातन परम्परा के वाहक थे

2019 के संसदीय चुनाव में प्रधानमंन्त्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक बने जगदीश चौधरी के निधन से पूरी काशी में शोक है। पीएम ने लिखा कि वाराणसी के डोम राजा जगदीश चौधरी जी के निधन से अत्यंत दुख पहुंचा है। वे काशी की संस्कृति में रचे-बसे थे और वहां की सनातन परंपरा के संवाहक रहे। उन्होंने जीवनपर्यंत सामाजिक समरसता के लिए काम किया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और परिजनों को इस पीड़ा को सहने की शक्ति दे।

योगी ने डोमराजा को बताया समरसता का प्रतीक

डोमराजा की मौत पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर उन्हें सामाजिक समरसता की भावना का प्रतीक बताया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने ट्वीट में लिखा है कि ‘सामाजिक समरसता की भावना के प्रतीक पुरुष, काशीवासी डोमराजा श्री जगदीश चौधरी जी का निधन अत्यंत दुःखद है। श्री जगदीश चौधरी जी का कैलाशगमन सम्पूर्ण भारतीय समाज की एक बड़ी क्षति है। बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना है कि आपको अपने परमधाम में स्थान प्रदान करें। ॐ शांति!’

डोम राजा ने कहा था- नेता वोट मांगने आते हैं लेकिन बाद में सुध नहीं लेते

तब डोम राजा ने कहा था कि ‘पहली बार किसी राजनीतिक दल ने हमें यह पहचान दी है और वह भी खुद प्रधानमंत्री ने। हम बरसों से लानत झेलते आए हैं। हालात पहले से सुधरे जरूर हैं, लेकिन समाज में हमें पहचान नहीं मिली है और प्रधानमंत्री चाहेंगे तो हमारी दशा जरूर बेहतर होगी।’ उन्होंने यह भी कहा था कि, ‘नेता वोट मांगने आते हैं लेकिन बाद में कोई सुध नहीं लेता।’ डोम बिरादरी का इतिहास काफी पुराना है।

घाटों पर अंतिम संस्कार करने वाले डोम परिवार के लिए हमेशा चिंतित रहे

उन्होंने यह भी बताया था कि काशी में हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाट में करीब 500 से 600 डोम रहते हैं जबकि उनकी बिरादरी में पांच हजार से ज्यादा लोग हैं। दो घाट पर सभी डोम की बारी लगती है और कभी दस दिन या बीस दिन में बारी आती है। बाकी दिन बेगारी। कोई स्थायी नौकरी नहीं है और कमाई भी इतनी नहीं कि बच्चों को अच्छी जिंदगी दे सकें।

उन्होंने पीएम मोदी का प्रस्तावक बनने पर गर्व जताते हुए कहा था कि ‘यह पूरी बिरादरी के लिए गर्व की बात है कि मैं प्रधानमंत्री का प्रस्तावक बन सका। हम समाज में पहचान पाने को तरस गए हैं। उम्मीद है कि नरेंद्र मोदी जीतने के बाद हमारी पीड़ा समझेंगे और हमें वह दर्जा समाज में दिलाएंगे जिसकी शुरुआत आज हुई है।’