सोशल मीडिया पर ईवीएम के पक्ष में बहस

सोशल मीडिया पर ईवीएम को लेकर पोस्ट-वार जारी है, लोग ईवीएम के पक्ष में लगातार बहस कर रहे है। वहीं सूत्रों के अनुसार चुनाव आयोग मशीनों को लेकर ‘गलतफहमी’ को दूर करने के लिए एक बड़ा जागरूकता अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा है। सोशल मीडिया पर #Mayawati ट्रेंड करने लगा है। लोगों का कहना है कि मायावती को हार स्वीकार करनी नहीं आती है। अब जब वो हार गईं हैं तो उन्हें यह मान लेना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके आरोपों को बचकाना बताया है। ईवीएम से जुड़े कई तरह के संदेशों में सोशल मीडिया पर भरमार है। लोग जहां पुराने केसेज का हवाला दे रहे हैं, तो वहीं ईवीएम में गड़बड़ी से जुड़ी पुरानी न्यूज शेयर कर रहे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा संख्या में वे लोग हैं जो यो मानते है कि भारत के लोकतंत्र को मजबूत करने में ईवीएम का बड़ा योगदान है। ईवीएम के पक्ष में दो पुस्तकों का हवाला दिया जा रहा है उनमें

यूसिंग टेक्नलोजी टू स्ट्रैंनथिन डेमोक्रेसी. द इंम्पोक्ट आफ इलैक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन आन इलैक्टोरल फ्राड, डेमोक्रेसी एंड डवलपमैंट खास है। इन पुस्तकों में एक्सप‌र्ट्स के हवालों से मानें तो ईवीएम में ऑनलाइन की कोई व्यवस्था नहीं होती, उसे हैक करने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

ईवीएम मशीन के रूप में काम करती है इसमें बदलाव सम्भव नहीं। नियंत्रण इकाई के कामों को नियंत्रित करने वाले प्रोग्राम “एक बार प्रोग्राम बनाने योग्य आधार पर”माइक्रोचिप में नष्ट कर दिया जाता है। इसकी कॉपी नहीं हो सकती या कोई बदलाव नहीं हो सकता।

और सबसे बड़ी बात वोटिंग से पहले मॅाक पोलिंग कराई जाती जिसमें पार्टी एजेंट और पोलिंग पार्टी मिलकर संतुष्टि करते है। चुनाव आयोग अब इन मशीनों को लेकर ‘गलतफहमी’ को दूर करने के लिए एक बड़ा जागरूकता अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

सूत्रों ने बताया कि EVM की निष्पक्षता और इसमें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हो सकने की जानकारी देने को लेकर एक रणनीति बनाने पर उच्च स्तरीय चर्चा की जा रही है। चुनावी प्रक्रिया और EVM पर भरोसे को बरकरार रखना सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग राजनीतिक दलों, मीडिया और जनता सहित सभी पक्षों को शामिल करना चाहता है।