इलाहाबाद में महर्षि भारद्वाज की 51 फिट ऊंची प्रतिमा लगाने की मांग

इलाहाबाद । प्रयाग के आदि पुरुष भारत भाग्य विधाता महर्षि भरद्वाज जो माघ मेला और कुंभ मेला के प्रणेता थे कि विशाल 51 फीट ऊंची प्रतिमा प्रयाग में लगे इसके लिए इलाहाबाद के कई संगठनों और व्यक्तियों द्वारा मिलकर ‘ भारत भाग्य विधाता’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत प्रयागराज मेला प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से यह मांग की जा रही है कि प्रयाग में कुंभ से पूर्व विशाल प्रतिमा स्थापित की जाए। महर्षि भारद्वाज का सामाजिक महत्व है उन्होंने भारतीय सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उसे एक दृष्टि से देखा इसलिए यह हमारे गौरव और अस्मिता का प्रतीक है। यह प्रतिमा इलाहाबाद जिला प्रशासन या उत्तर प्रदेश अथवा केंद्र सरकार स्थापित करें।

भारत भाग्य विधाता अभियान के प्रवक्ता श्री अशोक पाठक ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि सिविल इवैल्यूएशन फाउंडेशन ने लगभग एक वर्ष पूर्व मूल प्रस्ताव दिया था। जिसमें यह मांग की गई है कि महर्षि भरद्वाज की विशाल प्रतिमा लगभग 10 फुट ऊपर चबूतरे पर स्थापित की जाय, और इस चबूतरे में महर्षि भरद्वाज के जीवन चरित्र तथा उपलब्धियों का अंकन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में किया जाय। जिससे आमजन महर्षि भरद्वाज जैसी महान विभूतियों के बारे में जान सके ।

उन्होंने बताया कि इसके लिए लगभग 1 वर्ष से पूर्व एक समिति बनाकर यह आंकलन किया था जिसमें यह पाया गया कि प्रयाग के आदि पुरुष महर्षि भरद्वाज हैं इनकी प्रतिमा इलाहाबाद में लगने से एक अच्छा सामाजिक संदेश समाज में जाएगा । उन्होंने बताया कि महर्षि भरद्वाज रिग वैदिक काल के ऋषि थे जिनका गोत्र आज की सभी जातियों में मिलता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि महर्षि भरद्वाज रिग वैदिक काल मे बिना भेदभाव और पंथनिरपेक्ष होकर सभी को शिक्षा प्रदान किये। ऐसे मे यह कहा जा सकता है कि महर्षि भरद्वाज भारत के भाग्य विधाता थे और इनकी मूर्ति समाज को नई प्रेरणा देगी ।

यह प्रस्ताव 1 वर्ष पूर्व देने के पश्चात जब इस पर शासन प्रशासन ने कोई निर्णय नहीं लिया तो पुनः प्रयागराज मेला प्राधिकरण के गठन के बाद कुंभ मेला अधिकारी को एक प्रत्यावेदन विगत दिनों श्री वीरेंद्र पाठक की अगुवाई में देकर विशाल प्रतिमा स्थापित करने की मांग की गयी। श्री अशोक पाठक ने बताया कि कुंभ मेला अधिकारी ने यह आश्वासन दिया है कि इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के समक्ष भी रखा जाएगा तथा अमृतकुंभ में भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने अपनी तरफ से यह आश्वासन भी दिया कि एक बड़ी अस्थाई प्रतिमा जरूर कुंभ मेला में लगाया जा सकता है ।

अशोक पाठक ने यह भी बताया कि संत समाज का बड़ा समर्थन प्राप्त हो रहा है। अखाड़ा परिषद के महराज हरि गिरि महाराज ने भी वैचारिक समर्थन दिया है। स्वामी टीकरमाफी ब्रह्मचारी जी का आशीर्वाद व प्रयाग के सभी महत्वपूर्ण संतों का आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है इस भारत भाग्य विधाता अभियान को ।

शीघ्र ही प्रतिनिधिमंडल जनप्रतिनिधि मंत्री उप मुख्यमंत्री और माननीय मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी मांगों से अवगत करायेगा। इसके लिए सभी को पत्र भेजा गया है । साथ ही व्यक्तिगत रूप से भी संपर्क करके विशाल प्रतिमा निर्माण के लिए समर्थन जुटाया जा रहा है । इस अभियान मे मुख्य रूप से प्रोफेसर आर पी मिश्रा न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय सहित प्रयाग के प्रबुद्ध लोग अगुवाई कर रहे हैं।

पत्रकार वार्ता में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए एस पी तिवारी ने बताया कि समाज को नई दिशा देने में महर्षि भरद्वाज की विशाल प्रतिमा महत्वपूर्ण योगदान देगी। मूल प्रस्ताव मे महर्षि भरद्वाज के जीवन चरित्र व संक्षिप्त उपलब्धियों का उल्लेख है जिसमें यह कहा गया है कि ऐतिहासिक वह तथ्यों से यह स्पष्ट है कि भगवान राम को महर्षि भरद्वाज ने आशीर्वाद और मार्गदर्शन दिया था, महर्षि भरद्वाज का गोत्र आज हर जाति में पाया जाता है इससे यह स्पष्ट है कि जाति पंथ से ऊपर उठकर उनकी शिक्षा सभी ने ग्रहण की थी।

पुराणों में अन्य धर्म शास्त्रों में उनके बारे में अनेक उल्लेख हैं । उनको माघ और कुंभ मेला का प्रणेता बताया गया है । इसी तरह वह इस सभ्यता के सबसे पहले कुलपति थे जिनके पास 10,000 से अधिक शिष्य पढ़ने आते थे महर्षि भरद्वाज ने ही सबसे पहले यंत्र सर्वस्व नामक ग्रंथ की रचना की थी जिसमें विमानों के निर्माण की बात कही गई है वह ऋग्वेद के छठवें मंडल के रचयिता हैं।

पत्रकार वार्ता में कार्यक्रमों के आगे आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉक्टर प्रमोद शुक्ला ने बताया कि आगामी 12 अप्रैल जिलाअधिकारी के यहां प्रदर्शन किया जाएगा साथ ही छोटी छोटी बैठके करके जन जागरण अभियान चलाया जा रहा है । जिसमें लोगों को महर्षि भरद्वाज के जीवन चरित्र और उपलब्धियों के बारे में अवगत कराया जा रहा है।