अयोध्या : 70 एकड़ क्षेत्र में बने मंदिरों के ध्वस्तिकरण का शुरू होगा काम जर्जर हालत में है 13 प्राचीन मंदिर

अयोध्या : राम मंदिर निर्माण के लिए जगह का विस्तार करने की कवायद शुरू हो गई है। इसके जद में कई प्राचीन व जर्जर हाल में इससे सटे मंदिर आ रहें है। जिन्हें खाली किया जा रहा है। अब इनके ध्वस्तिकरण की तैयारी है। राम मंदिर के 5 एकड़ विस्तार क्षेत्र में फिलहाल सीता रसोई मंदिर, साक्षी गोपाल मंदिर, व जन्म स्थान मंदिर के साथ मानस भवन का आधा हिस्सा आ रहा है। जिसे खाली करवाया जा रहा है।

राम लला मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास के मुताबिक सीता रसोई व जन्म स्थान मंदिर मे से मूर्तिया वगैरह हटा ली गई है। इनमें रखे सामान भी हटा लिए गए हैं। दरवाजे व खिडकियां, बिजली की वायरिंग, पंखे, वाटर पाइप लाइन आदि को हटाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पहले चरण में केवल उन्हीं मंदिरों व भवनों का ध्वस्तिकरण किया जाएगा जो राम मंदिर के विस्तार क्षेत्र में आ रहे हैं। श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्स्ट के सूत्रों के मुताबिक मंदिर का निर्माण शुरू करने के लिए इसके क्षेत्र को बढाया जा रहा है जिसमें इससे सटे जर्जर भवन व मंदिर आ रहें हैं। इनको गिराने के पहले इनमें रखे सामानों व विग्रहों को खाली किया जा रहा है। ध्वस्तिकरण के पहले इनके दरवाजे व खिड़कियों को निकाला गया है। अब एलएंडटी कंपनी जल्द ही उनके ध्वस्तिीकरण की तैयारी में है।

बताया गया कि 1992 मे विवादित ढांचे के विध्वंस के बाद 70 एकड़ के अधिग्रहण क्षेत्र में करीब एक दर्जन मंदिर आ गए थे जिनमे सुरक्षा के नाम पर धार्मिक कार्यक्रम आदि बंद हो गए थे। करीब 28 साल के बीच इंन मंदिरों की हालत बिना देख रेख के जर्जर हो गई है। लेकिन अभी केवल उन्ही मंदिरों को ही हटाया जा रहा है। जो मंदिर के क्षेत्र में आ रहे हैं। नाप जोख केवल इसी के क्षेत्र की हो रही है।

पुजारी के मुताबिक कोहबर भवन, आनंद भवन, राम खजाना मंदिर, को फिलहाल नही तोड़ा जाएगा। इनको सड़को के चौड़ीकरण के समय तोड़ा जा सकता है।फिलहाल मंदिर के निर्माण को लेकर सामाग्री लाने मे मेंन रोड का उपयोग किया जा रहा है । इसलिए अभी बाकी मंदिरों के बारे में ट्स्ट अपनी क्या योजना बनाता है ,अभी तय नहीं है ।