पोलिटिकल टूरिज्म : हाथरस घटना पर पर सामाजिक राजनीति धरने प्रदर्शन आंदोलन
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हाथरस / उप्र । हाल के सालों का ट्रेंड देखें तो महिला सुरक्षा या रेप जैसे मुद्दे पर ही सबसे अधिक जन-आंदोलन हुए है। पिछले तीन सालों में अलग-अलग राज्यों में दर्जन भर बड़े आंदोलन हो चुके हैं जिसका सियासी असर भी साफ देखने को मिला। जहां भी रेप के खिलाफ आंदोलन हुआ है वहां की सरकार को दबाव में आना पड़ा है। जब अखिलेश यादव प्रदेश के सीएम थे तब बदाऊं रेप के आरोप का मामल सामने आया था यह उनकी सरकार के खिलाफ असंतोष पनपने की शुरूआत यहीं से हुई थी। पिछले दो साल के अंदर पूरे देश में रेप के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर 13 विधासभा चुनाव में चर्चा हो चुकी है।

हाथरस कांड के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार दबाव में है। विपक्ष इस प्रदेश से लेकर देश तक बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश में है। उनकी मंशा है कि योगी से लेकर मोदी सरकार तक को इस मसले पर घेरे। भाजपा और कांग्रेस दोनों के ही नेता इन अपराधों के बहाने पर एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं।

सरकार अपराधियों को बचाने के लिए आधिकारिक तौर पर घटना को फर्जी बताती रही। मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार तक घटना को लगातार फेक न्यूज साबित करने में जुटे रहे। हाथरस घटना पर स्मृति बोलीं, योगी करेंगे न्याय, राहुल कर रहे राजनीति। हाथरस की घटना पर झारखंड की सियासत में बवाल, CM सोरेन ने केंद्र सरकार पर उठाए सवाल. केंद्र सरकार को कोई लेना देना नहीं है, सिर्फ राजनीतिक रोटी सेंकने की कोशिस।

यूपीए 2 में निर्भया आंदोलन की बहुत बड़ी भूमिका
दरअसल. महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सशक्त कानून बनाने में यूपीए 2 में निर्भया आंदोलन की बहुत बड़ी भूमिका रही। निर्भया केस के बाद लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूटा। देश भर में लोग सड़कों पर उतरे। सियासत में इसका असर भी देखा गया और यूपीए 2 सरकार की बड़ी हार के पीछे इस आंदोलन को भी बड़ा कारण माना गया। केंद्र ही नहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव में शीला दीक्षित की कांग्रेस सरकार के खिलाफ बड़ी नारागजी और अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत के पीछे भी यह आंदोलन बड़ा कारक माना गया। 2016 में हिमाचल प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में भी तब वीरभद्र सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार की हार के पीछे रेप ही बड़ा मुद्दा बना। रेप केस को दबाने का आरोप वीरभद्र सिंह सरकार पर लगा था।

महिलाएं चुनावों में निर्णायक फैक्टर बनकर उभरी
रेप के खिलाफ गुस्सा और राजनीति पर उसके बढ़ते असर के पीछे एक बड़ा कारण हाल की तारीख में महिलाओं का चुनावों में निर्णायक फैक्टर बनकर उभरना भी है। पिछले एक दशक में महिलाओं की भागीदरी में बड़ा बदलाव आया है और वह सबसे बड़ा वोट बैंक बनी है। किसी की सियायत को ऊपर या नीचे करने में महिलाओं ने भूमिका निभायी और इसके स्थापित मिसाल रहे हैं। जाहिर है रेप ऐसा मुद्दा है जो महिलाओं की संवेदनशीलता को सबसे गहराई से झकझोरता है। ऐसे में कोई भी राजनीतिक दल हो,उनके गुस्से से बचते हुए उनके पक्ष में खड़ा दिखाना चाहती है। रेप के नाम पर हो रहे आंदोलन के पीछे सबसे बड़ा कारण यही है।

विपक्षी दलों में टीएमसी भी हाथरस कांड में कूटी और पार्टी सांसद मौके पर पहुंच गया। इस मसले पर टीमएसी की आक्रामक इंट्री थोड़ा चौंकाने वाले था क्योेंकि प्रदेश में उनका खास जनाधार नहीं है। लेकिन टीएमसी ने इस मामले में यूपी की योगी सरकार को घेरकर संदेश पश्चिम बंगाल तक देने की कोशिश की। वहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और बीजेपी प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मुद्दा बना रही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार के अंदर कानून-व्यवस्था को हवाला देकर काउंटर करने की कोशिश कर सकती है।