जब भी मैच फसता था धोनी अपना ‘एक्स फैक्टर’ लाए और यही उनका ‘मास्टरस्ट्रोक’ कहलाया

धोनी के करिश्मे जिसे हमेशा याद रखा जाएगा, उसके पीछे हमेशा होते थे उनके ‘मास्टरस्ट्रोक’. क्रिकेट के मैदान में कंप्यूटर से तेज दिमाग धोनी का चलते हर किसी ने देखा. वो हर बार कुछ ऐसा करते जो चौंकाने वाला होता. जो कोई सोच भी नहीं पाता था धोनी वो ही करते थे. टेस्ट क्रिकेट हो या अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट, उनके संन्यास का तरीका भी ऐसा ही रहा. आइए आपको याद दिलाते हैं धोनी की कामयाबी के कुछ मास्टरस्ट्रोक, जो उनके अलावा शायद ही किसी और खिलाड़ी के दिमाग में आ सकते थे.

क्रिकेट का खेल बल्ले और गेंद की सीधी लड़ाई है. धोनी ने इसे हमेशा इतना ही आसान रखा. लेकिन जहां कभी मामला पेंचीदा हुआ धोनी अपना एक्स फैक्टर लाए. ये एक्स फैक्टर ही दरअसल उनका मास्टरस्ट्रोक कहलाया. 2007 टी-20 विश्व कप का वो मैच याद कीजिए जब भारत को पाकिस्तान के खिलाफ बॉल आउट में जाना पड़ा था.

दरअसल वो मैच पाकिस्तान ने जीत ही लिया था लेकिन भारतीय टीम ने आखिरी ओवर में बाजी पलटी और मैच बॉल आउट तक गया. अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कभी किसी ने ऐसा सोचा नहीं था कि विकेट पर निशाना लगाना होगा. रॉबिन उथप्पा ने उस मैच में भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाए थे. वो धोनी के पास गए और उन्होंने कहा कि वो विकेट पर निशाना लगा सकते हैं.

उथप्पा गेंदबाज नहीं थे लिहाजा उन्हें ये जिम्मेदारी देना महंगा पड़ सकता था. लेकिन धोनी ने पलक झपकाए बिना कहा-ओके. उथप्पा ने अपना वायदा पूरा किया. सहवाग और भज्जी ने भी सही निशाना लगाया और अपनी तरह के अनोखे मैच में भारत ने पाकिस्तान को धो दिया.

इसके बाद इसी टूर्नामेंट के फाइनल में एक बार फिर भारत पाकिस्तान का ही आमना सामना हुआ. इस बार लगा कि पलड़ा पाकिस्तान का भारी है. एक ही टूर्नामेंट में दो बार पाकिस्तान को हराना आसान भी नहीं था. लेकिन धोनी इस तरह की सोच को पलटने में ही भरोसा रखते थे. भारत ने पाकिस्तान को 158 रनों का लक्ष्य दिया था.

आखिरी ओवर में पाकिस्तान को जीत के लिए 13 रन चाहिए थे. क्रीज पर मिस्बाह उल हक थे. धोनी ने आखिरी ओवर जोगिंदर शर्मा को थमा दिया. एक ऐसे खिलाड़ी को जिसके पास इतने तनाव भरे मैच में गेंदबाजी के अनुभव की बात तो दूर भारत के लिए गिने चुने मैचों में ही गेंदबाजी का अनुभव था. लेकिन जोगिंदर शर्मा ने कप्तान के इस मास्टरस्ट्रोक को सही साबित किया. बाकी बातें इंतिहास में दर्ज हैं.

2011 विश्व कप में भी चला मास्टरस्ट्रोक

धोनी का ये मास्टरस्ट्रोक 2011 विश्व कप में भी देखने को मिला. फाइनल में भारतीय टीम श्रीलंका के खिलाफ 275 रनों के लक्ष्य का सामना कर रही थी. मुश्किल तब बढ़ गई जब 31 रन के स्कोर पर सचिन और सहवाग दोनों पवेलियन लौट गए. इसके बाद जब विराट कोहली आउट हुए तो टीम इंडिया के फैंस ने धोनी का एक और मास्टरस्ट्रोक देखा.

पूरे टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में चल रहे युवराज सिंह ही जगह ड्रेसिंग रूम से धोनी निकले. हर कोई चौंक गया. धोनी विश्व कप में बहुत औसत फॉर्म में चल रहे थे. जबकि युवी का बल्ला जबरदस्त चमक रहा था. लेकिन धोनी ने खुद को बल्लेबाजी क्रम में प्रमोट किया. वो क्रीज पर आए और गौतम गंभीर के साथ मिलकर उन्होंने भारतीय टीम को वापस पटरी पर लाने का काम किया.

गौतम गंभीर ने भी धोनी का शानदार साथ दिया. 42वें ओवर में गंभीर जब आउट हुए तब तक धोनी का मास्टरस्ट्रोक काम कर चुका था. अब मैच भारत की झोली में ज्यादा था. इसके बाद क्रीज पर आए विश्वकप के सबसे बड़े स्टार युवराज सिंह. ठीक सात ओवर बाद धोनी के बल्ले ये निकला ये शॉट विश्व क्रिकेट के इतिहास में एक और कीर्तिमान दर्ज कराने के लिए काफी था.

दरअसल, ये सिर्फ दो मैचों के मास्टरस्ट्रोक की बात नहीं है. धोनी की कप्तानी में कुछ तो था जो उन्हें अलग करता था. वो आखिरी मिनट तक दिमाग के घोड़े दौड़ाते रहते थे. उनमें वो सोच थी कि जब तक मैच की आखिरी गेंद न फेंक दी जाए तब तक कुछ भी हो सकता था.

एक सेकेंड के लिए आंखे बंद करके सोचिए आपको जाने कितने मैच याद आएंगे जिसमें धोनी मैच को आखिरी ओवर तक ले गए और फिर आखिरी ओवर में छक्का लगाकर टीम को जीत दिला दी. कुछ मौकों पर तो उन्होंने ये कारनामा मैच की आखिरी गेंद पर किया.

इस आत्मविश्वास की वजह बहुत साफ थी छोटे से शहर से निकलकर कामयाबी और शोहरत की इस बुलंदी का सफर उन्होंने सिर्फ और सिर्फ अपनी काबिलयत पर तय किया था. उनका संन्यास भी किसी मास्टरस्ट्रोक से कम नहीं. देश की आजादी का दिन ही उनकी आजादी का भी दिन बन गया.