संगमरमर की चट्टानों में धुआंधार Dhuandhar in marble rocks

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संगमरमर की चट्टानों में धुआंधार नामक जल प्रपात बड़ा मनमोहक है। एक मनोहारी स्वप्न भूमि भेड़ाघाट के लिए कही जाएं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. आंखों को सुकून देकर मन मोह लेने वाले झरने, संगमरमरी चट्टानें और अपने आकर्षक दृश्य के लिए यह विश्व प्रसिद्ध है. जबलपुर से भोपाल की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर जबलपुर नगर से लगभग 21 किलोमीटर की दूरी पर भेड़ाघाट नाम का एक छोटा सा गांव है.

संगमरमरी चट्टानों से सजा ये गांव नर्मदा नदी के तट पर बसा है. प्रदेश के पर्यटन विकास निगम ने भेड़ाघाट को विश्व हेरिटेज का दर्ज़ा दिलाने के लिए यूनेस्को को प्रस्ताव भेजा है. क्योंकि भेड़ाघाट भी विश्व पर्यटन के नक्शे में नज़र आएगा और इस उपलब्धि से रोज़गार के अवसर भी खुलेंगे. यह जबलपुर वासियों के लिए हर्ष और उल्लास का विषय है.

नर्मदा नदी पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली भारत की सबसे लंबी नदी है, जिसे स़िर्फ नदी न मानकर देवी मां अमृतस्य का नाम माना गया है. यह देश के उत्तर तथा दक्षिण को सांस्कृतिक रूप से विभाजित करती हुई उत्तरी अंचल के विंध्य पर्वत श्रृंखला के अमरकंटक से निकलती है. अमरकंटक के उद्‌गम स्थल से 327 किलोमीटर के पश्चिम की ओर बहने के बाद नर्मदा भेड़ाघाट के संगमरमरी नगरी में प्रवेश करती है.

यहां पर नदी अपनी चौड़ाई की तिहाई भाग तक सिकुड़ जाती है और नदी 32 मीटर की ऊंचाई वाली शक्तिशाली एवं अद्भुत संगमरमरी चट्टानों के मध्य से लगभग 3.22 किलोमीटर की दूरी तक प्रवाहित होकर निकलती है. यह भेड़ाघाट का ऐसा सौंदर्यमयी अद्भुत दृश्य है जो संभवत: विश्व में अद्वितीय है.

भारत वर्ष की सभी नदियों में यह एक ऐसी नदी है जो भेड़ाघाट में पत्थरों का सीना चीरकर प्रवाहित होने वाली प्रसिद्ध नदियों में अतुलनीय है. स्वच्छ पारदर्शी चौंधियाने वाला शांत जल, कल-कल, क्षल-छल करता तट का निर्माण करने वाली संगमरमरी चट्टानों के विस्तृत नीले गगन के नीचे आश्चर्यजनक चकाचौंध छंटा उत्पन्न करती है. स़फेद बर्फीली चोटियों के नीचे परिवर्तित होने वाला सूर्य प्रकाश अपने तेज़ को खोकर सोने की गेंद की तरह परिवर्तित हो जाता है.

सबसे खूबसूरत नज़ारा तो रात का होता है जब आसमान में फैले तारे और चांद, भेड़ाघाट के शांत जल में चमकते हैं. ऐसा लगता है मानो करोड़ों जुगनू जल में आईने की तरह अपनी खूबसुरती निहार रहे हों और चांद पानी में ज़रा सी हलचल से नृत्य शुरू करने लगता हो. चांदनी रात में जब जल विस्तार दूर-दूर तक आसमान से जुड़ा दुधिया रंग की चादर के समान परिवर्तित हो जाता है तब यह किसी सपने की दुनिया से कम नहीं होता.

ऐसे में खड़ी नुकीली रंग-बिरंगी चट्टानों के बीच नौकायन निश्चय ही अद्भुत आनंद देने वाला होता है. इस अनंत सौंदर्य से आंखें नहीं थकतीं और कान निर्जन एकांत में पानी की लगातार होने वाली कल-कल, छल-छल की ध्वनि सुनते नहीं अघाते. इस पावन और ताकतवर नदी के एक संकरे स्थान पर जहां गहराई वाली विपरीत तटों की संगमरमरी चट्टानें एक दूसरे के नज़दीक आती हैं, उसे यहां रहने वाले लोगों ने बंदर कूदनी नाम दिया है.

यात्री विश्रामगृह के निकट विशाल जल राशि की गहराई 51.51 मीटर है. यहां की दरार पहले सबसे शक्तिशाली झरने का निर्माण करती है. विशाल जल राशि का पत्थरों से टकराकर तेज रफ्तार से नीचे गिरना और रफ्तार इतनी की पानी का 40 प्रतिशत भाग धुएं की तरह ऊपर वातावरण में फैल जाता है. इस तरह का परिवेश इतना अद्भुत और इंद्रधनुषीय होता है, जिसे देख पर्यटकों के अल्फाज़ों में धुंआधार की तारी़फ ही हो सकती है. नर्मदा पर भेड़ाघाट में वाण-कुंड तथा रूद्र कुंड अन्य चित्रण योग्य स्थान है जो धार्मिक एवं पौराणिक कथाओं से संबंधित है.

आजकल भेड़ाघाट विकास प्राधिकरण के प्रयासों से एक रोप वे का निर्माण किया गया है. सच मानों इसकी ट्राली में धुंआधार का अतुलनीय सौंदर्य जब निगाहों के एकदम सामने आता है तब मानों सांसे थम सी जाती है. सतरंगी पानी के फुहारों से सराबोर, धुंआधार के दूसरी ओर नया भेड़ाघाट है. भेड़ाघाट के नामकरण से संबंध में अनेक पौराणिक कथाएं प्रचलित है, जो उसके स्थलों की पवित्रता को प्रमाणित करती है.