MP हाईकोर्ट का आदेश, रेप के हर मामले में हो DNA टेस्ट
जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर उच्च न्यायालय ने आज एक मामले
की सुनवाई करते हुए दुष्कर्म के प्रकरणों के मामले में राज्य सरकार को महत्वपूर्ण
दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने आरोपी और पीड़िता के डीएनए का मिलान करने का
आदेश दिया है।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अतुल श्रीधर की एकलपीठ द्वारा
दुष्कर्म के आरोपी द्वारा जमानत के लिए दायर याचिका की सुनवाई करते हुए जारी आदेश
में कहा कि दुष्कर्म के मामले में आरोपी का डीएनए टेस्ट करवाया जाए। पीड़िता की
एमएलसी के दौरान जननांग व कपड़ों में मिले रक्त व अन्य की फोरेंसिक जांच कराई जाए
और उसका मिलान आरोपी के डीएनए से किया जाए।
आदेश में कहा गया है कि दुष्कर्म के कारण गर्भवती होने की
स्थिति में बच्चे के पैदा होते ही उसके डीएनए का मिलान आरोपी के डीएनए से कराया
जाए। वहीं, अगर गर्भ में बच्चे की
मौत हो जाती है या पीड़िता गर्भपात कराती है तो भी अविकसित भ्रूण का डीएनए करवाकर
उसका मिलान भी आरोपी के डीएनए से कराया जाए। दुष्कर्म पीड़ित गर्भवती महिला की मौत
होने पर भी इस प्रक्रिया का पालन किया जाए।
  
एकलपीठ ने आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक सहित सभी जिलों के
पुलिस अधीक्षक को भेजने के निर्देश भी दिए हैं। शहडोल जिले के लालपुर निवासी राजा
उर्फ राहुल वर्मन की तरफ से दायर जमानत याचिका में कहा गया कि धनपुरी पुलिस ने
उसके खिलाफ धारा 376 तथा 305 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। उस पर आरोप है कि
उसने शादी का प्रलोभन देकर एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म किया। लड़की के
गर्भवती होने पर उसने शादी से इंकार कर दिया। जिसके कारण नाबालिग लड़की ने
आत्महत्या कर ली।
याचिका में कहा गया कि उक्त किशोरी से उसके शारीरिक संबंध
नहीं थे। उस पर लगाए गए आरोप निराधार हैं, किशोरी के एक नाबालिग किशोर के साथ संबंध थे।

जमानत याचिका का विरोध करते हुए शासकीय अधिवक्ता के.एस.
पटेल ने एकलपीठ को बताया कि धारा 161 के तहत पीड़िता की मां व सहेली के बयान लिए
गए थे। उन्होंने अपने बयान में यह बात कही है कि आरोपी के पीड़िता के साथ संबंध थे, जिसके कारण वह गर्भवती हुई थी। एकलपीठ
ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए उक्त आदेश जारी किए हैं।