संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश, विकास दर 7.1% रहने का अनुमान

संसद के बजट सत्र के पहले चरण की शुरुआत कल हुई और वित्त वर्ष 2017-18 का आर्थिक सर्वेक्षण भी लोकसभा में पेश किया गया। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने संसद के समक्ष आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। चालू वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण देश की आर्थिक हालत का सटीक अनुमान होता है और माना जाता है कि इसके आधार पर बजट प्रस्तावों को तैयार किया जाता है।

अगले साल विकास दर 6.75 से 7.5 फीसदी रहने की उम्मीद जताई गई है। इस साल खेतीबाड़ी की विकास दर 4 फीसदी से ज्यादा रह सकती है। औद्योगिक विकास 5.2 फीसदी और सेवा क्षेत्र की विकास दर 8.8 फीसदी रहने की उम्मीद है। इस साल महंगाई दर औसतन 5 फीसदी के स्तर के आस पास रह सकती है। एक बड़ी सिफारिश के तहत सर्वे का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर इस साल वित्तीय घाटे के लक्ष्य में थोड़ी ढील दी जा सकती है।

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक इस साल की बढ़ी उपलब्धियों में जीएसटी विधेयक, बैंकरप्सी विधेयक का पारित होना, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति का गठन, आधार विधेयक पारित होना, एफडीआई नियमों में ढील, यूपीआई के जरिए बैंकिग लेनदेन को एक प्लेटफार्म पर लाना और टेक्सटाइल जैसे श्रम आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना शामिल हैं।

विमुद्रीकरण को लंबी अवधि में फायदे का सौदा बताते हुए सर्वे कहता है कि अप्रैल 2017 तक देश में कैश की समस्या बिल्कुल खत्म हो जाएगी।

सर्वेक्षण में जीएसटी को देश में एक साझा बाजार बनाने की दिशा में अहम कदम बताया गया है जो निवेश और विकास को बढ़ावा देगा। सर्वेक्षण के मुताबिक अगर रियल एस्टेट और स्टांप ड्यूटी को जीएसटी का हिस्सा बना दिया जाए, तो भारत दुनिया की सबसे तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था बन सकता है।

बैकों में एनपीए की समस्या पर सर्वे ने गहरी चिन्ता जताई है। देश में बैंकों के कुल कर्जे का 12 फीसदी एनपीए है जो दूसरे देशों की तुलना में काफी ज्यादा है। एनपीए की समस्या को दूर करने के लिए सर्वे में एक नई एजेंसी बनाने का सुझाव है जो राजनीतिक दबावों से परे कड़े फैसले ले सके।

सर्वे में पहली बार देश में हर नागरिक को यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम के तहत शामिल करने की वकालत की गई है। सर्वे के मुताबिक राज्यों में सब्सिडी की अलग-अलग योजनाओं की जगह पूरे देश में एक ही स्कीम लागू करने की वकालत की गई है।

सर्वे कहता है कि सरकार को शहरो में रोजगार के लिए पलायन को रोकने के लिए कपड़ा और लेदर सेक्टर्स के विकास पर ध्यान देना चाहिए, जिसमें रोजगार की बड़ी संभावनाएं हैं।