शिक्षण संस्थाओं को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का केंद्र नहीं बनने दिया जाए: केंद्र सरकार

दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में छात्र संगठनों के दो गुटों के बीच हिंसक प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को एक तरफ़ जहाँ छात्रों ने तिरंगा यात्रा निकाली तो दूसरी तरफ़ केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि शिक्षण संस्थानों में इस तरह की राजनीति बर्दाश्त नहीं है ।

डीयू में पिछले कुछ दिनों से जारी गतिविधियों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने सोमवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर की आज़ादी के नारे लगाने को कैसे कोई समर्थन कर सकता है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा शिक्षण संस्थानों में जाकर राजनीति की जा रही है और छात्रों को भड़काया जा रहा है, जो किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

वेंकैया नायडू ने कहा कि दूसरों की भावनाओं को आहत करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि सबको विरोध करने का हक है लेकिन ये संविधान के दायरे में होना चाहिए।

विवाद के बीच सोमवार को एबीवीपी के छात्रों ने दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में तिरंगा यात्रा निकली। वहीं मंगलवार को आइसा, एसएफआई समेत कई वाम छात्र संगठन मार्च निकालेंगे। इस बीच कॉलेज के प्रिंसिपल ने छात्रों से विरोध प्रदर्शनों से दूर रहने की अपील की है।

इस मामले पर केंद्रीय गृहमंत्रालय भी नजर बनाए हुए है और गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली पुलिस को बड़ी ही सतर्कता के साथ परिस्थितियों से निपटने के लिए कहा है। इससे पहले रविवार को लंदन में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि भारत के शिक्षा परिसरों में विनाश का गठजोड चल रहा है जिसके तहत अलगाववादी और अतिवामपंथी एक ही भाषा बोल रहे हैं।

गौरतलब है कि बीते बुधवार को रामजस कॉलेज के सेमिनार में जेएनयू के छात्र और राजद्रोह के मामले में आरोपी उमर खालिद को वक्ता के तौर पर बुलाए जाने का छात्रों का एक गुट विरोध कर रहा था जिसके बाद दो गुटों में मारपीट हुई जिसमें कुछ छात्र घायल हो गए थे।

दरअसल इन घटनाओं के मूल में छात्रों के एक गु़ट द्वारा अलग-अलग विश्वविद्यालयों में देशविरोधी नारे और गतिविधियाँ शामिल हैं जो सरकार के लिए चिंता की बात है। सरकार ने साफ कर दिया है कि इसकी अनुमति अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर बिल्कुल ही नहीं दी जा सकती।