मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में विधानसभा की 28 सीटों पर उपचुनावों (By-elections) के लिये रविवार शाम को चुनाव प्रचार थम गया

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मध्यप्रदेश में ये उपचुनाव शिवराज सिंह (Shivraj Singh )सरकार का अब भविष्य तय करेंगे. निर्वाचन आयोग द्वारा स्टार प्रचारकों की संख्या सीमित करने और लोगों के जुटने संबंधी सख्त दिशानिर्देश जारी किये जाने और कोविड-19 के साये में मंगलवार को होने जा रहे इन चुनावों के लिए आज प्रचार के आखिरी दिन सघन चुनाव प्रचार हुआ.

मुख्य प्रतिद्वंद्वी दलों भाजपा और कांग्रेस ने एक दूसरे पर तीखे प्रहार किये, खास तौर पर मध्य प्रदेश में जहां निर्वाचन आयोग ने दोनों दलों के नेताओं को फटकार लगाई और यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ का स्टार प्रचारक का दर्जा भी छीन लिया जिसे उन्होंने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है. मध्यप्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में भाजपा ने 30 से ज्यादा सीटों पर भाजपा ने कांग्रेस के पूर्व विधायकों को अपना उम्मीदवार बनाया है जिन्होंने इस्तीफा देकर भगवा पार्टी का दामन थाम लिया था.

मध्य प्रदेश राज्य में विधानसभा का गणित. : –

मध्य प्रदेश में कुल विधानसभा सीट- 230

बहुमत के लिए आवश्यकता -116

जो राजनैतिक दल या गठबंधन विधानसभा की 116 या उससे ज्यादा सीटें जीतेगी.

वो गठबंधन या दल मध्य प्रदेश की जनता के लिए आने वाले चुनाव तक नीति निर्धारण का कार्य करेगी व राज्य की संपूर्ण जिम्मेदारियों का पालन भी करेगी.

क्या है अब तक की स्थिति? : –

1 : – भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-107

2 : – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस-88

3 : – बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) – 2

4 : – समाजवादी पार्टी (सपा) -1

5 : – अन्य / निर्दलीय विधायक – 4

6 : – उपचुनाव के लिए रिक्त सीटें-28

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर एवं प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भाजपा प्रत्याशियों के लिए वोट मांगे, जबकि मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट एवं अन्य पार्टी नेताओं ने कांग्रेस के उम्मीदवारों को जिताने की लोगों से अपील की. कांग्रेसी नेताओं ने बागी विधायकों और सिंधिया पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘गद्दार’ करार दिया.

चुनिंदा सीटें कैसे? : –

भाजपा को उनके 107 विधायकों के अलावा 7 अन्य विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है और उसे पूर्ण बहुमत के लिए 28 में से 9 सीटें जीतने की जरूरत है. वहीं दूसरी पार्टी कांग्रेस के पास इस वक्त 88 विधायक मौजूद है. और इस परिस्थिति में कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए पूरी 28 सीटें जीतना जरूरी है. तो वहीं अगर बसपा या अन्य पार्टी 2 सीटों पर भी जीत हासिल करती है तो कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती है. खास बात ये है कि इन 28 सीटों में से 27 सीटों 2018 के चुनाव में कांग्रेस के विधायकों ने जीत हासिल की थी.

ग्वालियर-चंबल पर रहेगी सबकी नज़र

28 सीटों में से 16 सीटें ग्वालियर चंबल से ही आती है. जिसमे कांग्रेस-बीजेपी व तीसरी पार्टी बसपा जिसे कम नहीं आंका जा सकता, वहां कोई कमी नहीं छोड़ना चाहेंगी. खास बात यह भी हैं कि शिवराज के नए मंत्रिमंडल में 11 मंत्री ग्वालियर चंबल बेल्ट से ही आते हैं जिसमें 8 मंत्री सिंधिया गुट के हैं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि BJP-Scindia की हर पसंद को तव्वजो दे रहे हैं. जबकि भाजपा का नया राजनीतिक केंद्र अब ग्वालियर-चंबल को ही माना जा रहा है. क्योंकि यहीं से तय होगा कि सत्ता की कुर्सी पर कौन काबिज होगा?