भले ही देश टूट जाए लेकिन मोदी सरकार चली जाए
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में एक और बीमारी आ गई है – कन्हैया. भारत में नेता बनने का अवसर ऐसे मिलेगा मोदी जी के साथ वतन को गाली दो लुच्चे आपकी पीठ थपथापायेंगे. कन्हैया ने कहा है कि कश्मीर में भारतीय सेना कश्मीरी महिलाओं के साथ बलात्कार करती है. सेना पर इतना बडा इलजाम लगते हुए इस नीच की जुबान जरा भी अटकी नहीं. हमे दुख है कि जिस आर्मी के जवान अपनी जान पर खेलकर कन्हैया जैसे लोगों की देश में रक्षा कर रहे है ये उन्ही को बदनाम करके देश का होरो बनना चाहता है. कुछ लोगों को मीडिया में बने रहने की महारत मिली होती है, इस तरह देश को मिला एक और केजरीवाल, पहले वाले को स्वराज चाहिए था और दूसरे को आजादी.
“पति मर जाए तो चिंता नहीं, लेकिन सौतन विधवा हो जाए” बस यही हालत है विपक्षी दलों और सेक्यूलरों की, भले ही देश टूट जाए लेकिन मोदी सरकार चली जाए. कठोर मगर लचीला संविधान होने की वजह से कन्हैया जैसी बीमारियां जन्म लेती है जो कैसे भी करके मीडिया में बने रहना चाहते है ताकि देशहित के मुद्दो से जनता भटकती रहे. कन्हैया जिस संगठन से जुड़ा है वह (C.P.I.) अर्थात् Communist Party  Of Indira है. इन्दिरा जी ने JNU का उपयोग पूर्ण रूप से भारत की Communist Parties को अपने पक्ष में साधने के लिये किया था यह परंपरा अब तक चली आ रही थी परंतु मोदी सरकार में इस पर रोक लगा दी गयी. यह कान्ग्रेस तथा अन्य दलों के बेचैनी का कारण बन गया और कन्हैया पर राजनीति शुरू हो गयी है जनता समझदार है वह सब कुछ जानती है.
एक अंग्रेज अपनी आत्मकथा में लिखता है – “भारत को गुलाम बनाने के लिए जब हमने पहला युद्द किया और जीतने के बाद हम जब विजय जुलुस निकाल रहे थे, तब वहाँ मौजूद भारतीय जुलुस देख कर तालीया बजा रहे थे, अपने ही देश के राजा के हारने पर वे प्रसन्नता से हमारा स्वागत कर रहे थे, आगे अंग्रेज़ लिखता है अगर वहाँ मौजूद सब भारत वासी मिलकर उसी समय हम लोगो को सिर्फ एक-एक पत्थर उठाकर ही मार देते तो, भारत सन् 1700 में ही स्वतंत्र हो जाता , उस समय हम अंग्रेज सिर्फ 3000 थे” आज भी कुछ गद्दार देशद्रोही भारत वासी सुधरे नहीं है, ना इतिहास से सबक सीखा, हालत वही है.
कन्हैया जैसे लोगों को न घर की चिन्ता होती है और न ही देश की, बस चंद लोगों और चैनल पर खुद को अक्लमंद दिखाने के लिए अपने घर और देश की नुमाइश लगाने वाले कभी भी देशहित में नहीं सोच सकते हैं, और जो राजनेता साथ दे रहे हैं वो तो और भी पथभ्रष्ट हो सकते हैं, क्योंकि वोटबैंक के लिए भारत के महानतम राजनेता भारत की जनता को बेवकूफ़ बनाने में लगे रहते हैं ढकोसलेबाज लोगों को खुद ही समझ में आ जाना चाहिए कि ये देश उनकी बपौती नहीं है कि जब चाहे तब प्रयोग करने में लग गए.  भविष्य में ऐसे लोगों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है और सरकार को भी सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है ताकि ऐसे लोग देश का नाम न खराब कर सकें.
कन्हैया जैल से आने के बाद बोल रहा है की मै  भूख से लड़ रहा हु बेरोजगारी से लड़ रहा हु तो ये सब पिछले 18  महिने मे ही आया है क्या ?  पछले 60 सालो से देश सोने की चिड़िया बना हुवा था क्या । सिर्फ मोदी जी के आने से ये हो रहा है क्या ?  जो लोग सत्ता से वंचित हो गए है उन्होंने कभी ये देखा नहीं वो सह नहीं पा रहे, कन्हैया उन्ही लागो के हाथ का खिलौना है. राष्ट्रवादीयों को इसे महत्व नहीं देना चाहिये.
हमारे उग्र सेकुलर पत्रकार स्वयं जानते हैं कि उनके काम में पत्रकारिता कम हिन्दुत्व विरोधी मिशन अधिक है. इस धुन में वे अपना देश, धर्म सब भूल गए हैं. मिडिया और अकादमिक संस्थानों में छाई इस हिन्दू विरोधी प्रवृत्ति ने स्वतन्त्र (जनतन्त्र) को सबसे अधिक हानि पहुँचाई है. जब JNU में देश विरोधी नारे लगे थे तब अमेरिका ने भारत को घेर लिया था, बहुत सवाल-जवाब किये थे भारत से, भारत की छवि विश्व बिरादरी में कुछ यूँ बनायी कि भारत में छात्रों को दबाया जा रहा है, अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोंटा जा रहा है, इससे पूरी दुनिया में भारत की बड़ी थू-थू हुयी थी.
वर्तमान में देश की हालत देखते हुए एक लघु कथा इस ब्यवस्था पर एक दम सटीक बैठती है….
एक बार राजा को अभीमान हो गया कि मेरे देश मे कोई द्रोही नही हैं ,सब सही है. मुझे सबको और सुविधाऐ देना चाहिये. ये बात जाकर गर्व से गुरू को सुनाई. गुरू समझ गये. कुछ देर बाद वे घूमते हुए एक गोबर का उपला जो की दिखने में उपर से ही आधा सूखा था राजा को दिया.
राजा से पूछा – हे राजन ! ये थेपला उपर से कैसा है पर अंदर सूर्य रूपी ताप नहीं पहूँचा है.
राजा बोले – साधारण है गुरूदेव.
गुरू फिर बोले – कहीं ऐसा तो नहीं कि ताप नही लगने देने से उपला को ही नुकसान पहूंच रहा हो ?
राजा कहने लगे – ये कैसे संभव है  गुरूदेव ?
बोले – पलट के देखो ?
जैसे ही राजा ने उपले को पलटा, देखा अंदर जो गीला भाग है वहां कुछ कीड़े कुलबुला रहे थे. और उसे ही खा रहे थे. राजा ने गुरू की तरफ इस क्रिया का औचित्य जानने की दृष्टी से देखा ?
तो गुरू बोले – है राजन. आपके राज्य का भी यहीं हाल हो सकता है अगर सुविधा वाले को और सुखी करोगे. वे ही तुम्हारा नुकसान करेगे. ताप हरेक को बराबर मिलना चाहीये तो सही है तो सही रहता है. जिस प्रकार इसे पलटा और कीड़े कुलबुलाते पाये, जाओ, अपने राज्य मे भी वही करो, जो ज्यादा सुविधा पा रहा है ताप उसे भी दो, वरना वो ही तुम्हे खायेगा.
जिस प्रकार हम अपना घर बंनाने के लिए मजदूर और मिस्त्री चुनते है खुद हर काम को देखते है हर सामान देख कर लाते है सुरक्षा की हर बात को ध्यान मैं रखते है वैसे ही देश भी हमारा घर है जिसके लिए नेता चुनना, देश की सुरक्षा और हमारे पैसे का सही उपयोग करने वाला अच्छा नेता चुनना उसकी राजनीती करने का ढंग देखना जरूरी है. इसलिए अगर हम अपने घर बनाने के लिए समय निकाल सकते है तो देश बनाने के लिए भी समय निकालना ही पड़ेगा और राजनीती को ध्यान से देखना ही पड़ेगा ये काम हम किसी ऐसे लोगो के हाथ मैं नहीं दे सकते जो विदेशो से संचालित होते है.
कन्हैया जैसे पथभ्रष्ट छात्रों के कारण भारत की छवि धूमिल हो रही है. भारत में जन्म ले कर भारत का अन्न  जल  खा पीकर यह नमूना कुछ ओछी राजनीति  करने वालों  के हाथों की कठपुतली बना हुआ है और अपने से ही खुश हो रहा है और सब पर कीचड़ उछाल रहा है, मुफ्त में पढ़ने को मिल रहा है पर जल्दी ही यह अपने अंजाम तक पहुँचेगा और मुँह के बल नीचे गिरेगा जो लोग इसे चने के पेड़ पर चढ़ा रहे हैं वो ही इस नमूने को नीचे भी गिराएगे इस में कोई शक नही.