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स्ट्रॉन्ग रूम से बूथ और वहां से वापस स्ट्रॉन्ग रूम कैसे पहुंचाई जाती हैं EVM?

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इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन EVM को लेकर इन दिनों यूपी की सियासत गरमाई हुई है मंगलवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ट्रक में EVM मिलने से हंगामा मच गया। इसके बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर EVM चोरी का आरोप लगा डाला। वहीं चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन किया है। आइये इन आरोपों के बीच समझने की कोशिश करते हैं कि EVM को स्टोर रूम से मतदान केंद्र और वहां से वापस स्टोर रूम में कैसे लाया-ले जाया जाता है।

चुनाव न हो तो कहां रहती हैं EVMs?
अगर चुनाव न हो रहे हों तो किसी भी जिले में मौजूद सभी EVMs को जिला निर्वाचन कार्यालय के तहत ट्रेजरी या वेयरहाउस में रखा जाता है। जिस वेयरहाउस में ये मशीनें रखी जाती हैं, वहां सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त होते हैं। चुनाव आयोग के आदेशों के बिना इन मशीनों को यहां से हटाया नहीं जा सकता। मतदान के लिए भेजने से पहले इंजीनियर इन्हीं वेयरहाउस में इन मशीनों की जांच करते हैं।

चुनाव आने पर क्या होता है?
चुनाव नजदीक आने पर राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में इन मशीनों को विधानसभाओं के लिए आवंटित कर दिया जाता है। अगर किसी पार्टी का प्रतिनिधि उस वक्त मौजूद नहीं होता तो EVMs और VVPAT मशीनों के नंबरों की लिस्ट पार्टी कार्यालय में भेज दी जाती है। यहां से रिटर्निंग अधिकारी इन मशीनों को अपने नियंत्रण में ले लेता है और उन्हें स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है। यहां इनकी दूसरे स्तर की जांच होती है।

सुरक्षा का रखा जाता है विशेष ध्यान
जांच के बाद पार्टी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में इन मशीनों को मतदान केंद्रों पर भेजा जाता है। इस दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए तमाम प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। इसके बाद मशीनों पर उम्मीदवारों के नाम और चुनाव चिन्ह के साथ तैयार कर फिर से स्ट्रॉन्ग रूम में छोड़ दिया जाता है और सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के कंधों पर होती है। कई जगहों पर केंद्रीय बल भी इसकी निगरानी करते हैं।

पोलिंग पार्टियों को देने के लिए स्ट्रॉन्ग रूम से निकाली जाती हैं मशीनें
यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद पोलिंग पार्टियों को देने के समय ही ये मशीने स्ट्रॉन्ग रूम से निकाली जाती हैं। सभी पार्टियों और उम्मीदवारों को सूचना दे दी जाती है कि किस तारीख को कितने बजे स्ट्रॉन्ग रूम का ताला खोला जाएगा। आवंटित मशीनों के साथ-साथ कुछ रिजर्व मशीनों को भी स्ट्रॉन्ग रूम से निकालकर विधानसभा क्षेत्रों में ले जाया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कोई मशीन खराब होने पर उसे तुरंत बदला जा सके।

मतदान केंद्र से वापसी की प्रक्रिया क्या है?
मतदान खत्म होने बाद मशीन में रिकॉर्ड हुए मतों का हिसाब तैयार किया जाता है और इसकी फोटोकॉपी हर उम्मीदवार के पोलिंग एजेंट को दी जाती है। इसके बाद EVM को सील कर दिया जाता है। उम्मीदवार चाहें तो सील पर अपने हस्ताक्षर कर सकते हैं। यहां से मशीनों को स्ट्रॉन्ग रूम में ले जाया जाता है, जो आमतौर पर मतगणना केंद्र के पास ही बना होता है। रिजर्व मशीनों को भी वापस स्ट्रॉन्ग रूम में रख दिया जाता है।

मशीनें रखने के बाद फिर सील होता है स्ट्रॉन्ग रूम
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, सभी मशीनों को रखने के बाद स्ट्रॉन्ग रूम को सील कर दिया जाता है। पार्टी प्रतिनिधियों को चौबीसों घंटे स्ट्रॉन्ग रूम पर नजर रखने की भी छूट होती है। स्ट्रॉन्ग रूम सील होने के बाद उसे केवल मतगणना वाले दिन की सुबह ही खोला जा सकता है। अगर पहले किसी कारण से स्ट्रॉन्ग रूम खोलना पड़ जाए तो यह केवल उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ही हो सकता है।

जांच के बाद शुरू होती है मतगणना
स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था होती है और भीतरी घेरे की जिम्मेदारी केंद्रीय बलों के पास होती है। नतीजों के दिन उम्मीदवार या उनके प्रतिनिधियों द्वारा मशीन नंबर और सील की जांच के बाद ही मतगणना शुरू होती है।