फेक न्यूज का सबसे बड़ा जरिया वॉट्सऐप

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✍ आशीष शुक्ला

फेक न्यूज आज एक बहुत बड़ी चुनौती है और यह इतनी बड़ी हो गई है कि लोग इसको समझ नहीं पा रहे हैं। बहुत सारी चीजें जो आज वायरल कर दी जाती हैं, उसकी पड़ताल करने का कोई सही जरिया नहीं है। मीडिया के ज्यादातर सीनियर लोग इससे चिंतित भी हैं। इस पर काम भी हो रहा है। कुछ लोग अलग-अलग शहरों में फेक न्यूज की चुनौतियों से निपटने के लिए कॉन्फ्रेंस कर रहें हैं, इस टेक्नोलॉजी पर कंपनियों (फेसबुक, गूगल, वॉट्सऐप) से चर्चा भी हो रही है।

आज की तारीख में फेक न्यूज को फैलाने का सबसे बड़ा जरिया वॉट्सऐप बन गया है। वे लोग (सोशल मीडिया कंपनियां) किस तरह से फेक न्यूज को लेकर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और इससे पत्रकारों के सामने क्या चुनौतियां आ रही हैं, वे लोग इससे कैसे ठगे जाते हैं, यह चर्चा का विषय है। क्योंकि कई बार ब्रांड मीडिया संगठनों के नाम पर शब्दों का हेर फेर करके लोगों को ठगा गया है।

एक समय पर टेलिविजन न्यूज चैनल को लेकर भी कहा जाता था कि ये सब भूत, प्रेत की कहानियां दिखाते हैं, गाय उड़ाते हैं।

लेकिन फेक न्यूज को फैलाने वाले मीडिया संगठनों की विश्वसनीयता को खूब समझते हैं और इसलिए इसे वायरल करते हैं। लेकिन बहुत ही कम लोग होते हैं जो इसकी पुष्टि करना चाहते हैं। इसलिए आज ये जो फेक न्यूज का दौर आ गया है ये वेब पत्रकारिता के लिए बहुत बड़ी चुनौती है और ये सिर्फ पत्रकारों के लिए नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी के सामने भी बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है।

सेंसेशनल जर्नलिज्म वाली हेडलाइन भी आज एक चुनौती बनी हुई है। जैसे- ‘बीच सड़क पर क्या हुआ ऐसा, लोग देखते रह गए…’, इस तरह की हेडलाइन से आपको उकसाया जा रहा है कि आप क्लिक करके देखें कि हुआ क्या है। लेकिन कई बार आपको निराशा हाथ लगेगी, कि अरे सिर्फ यही बात थी। ये सेंसेशनल जर्नलिज्म है।

एक समय पर टेलिविजन न्यूज चैनल को लेकर भी कहा जाता था कि ये सब भूत, प्रेत की कहानियां दिखाते हैं, गाय उड़ाते हैं। लेकिन धीरे-धीरे समय बदला और परिपक्वता आई। यही परिपक्वता हम वेब पत्रकारिता में भी चाह रहे हैं और धीरे-धीरे ये यहां भी आएगी। जब धीरे-धीरे लोगों को इसकी वैल्यू समझमें आने लगेगी कि इस तरह कि हेडलाइन सिर्फ आपको बांधे रखने के लिए है, तो वे मात्र दो सेकेंड ही खबर पर रुकेंगे और आगे बढ़ जाएंगे, क्योंकि दो सेकेंड में ही पूरी खबर का सार पता लग जाएगा।

लेकिन तथ्य वाली खबरें, जिसमें पुख्ता चीजें होंगी, जानकारी बढ़ाने वाला कंटेंट होगा, तो शायद फिर पाठक 30 से 40 सेकेंड तक पढ़ना चाहेंगे, और यह तब होगा जब आगे चलकर वेबसाइट को विज्ञापन इस आधार पर मिलने लगेंगे कि आपकी खबरों पर लोग कितनी देर तक इंगेज रहते हैं। फिर खबर पर लोगों के इंगेज का समय धीरे-धीरे बढ़ता जाएगा और फिर एक से दो मिनट तक हो जाएगा। आने वाले समय में ये प्रवृत्तियां बदलेंगी।