निपाह वायरस से निपटने के लिए और तेज हुए प्रयास

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निपाह वायरस से केरल में दस लोगों की मौत के बाद इसकी रोकथाम के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं । केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इससे निपटने में जी जान से लगी हैं । केंद्र सरकार जहां लगातार हालात की समीक्षा कर राज्य को पूरी मदद पहुंचा रही है वहीं तमाम राज्यों में बीमारी को फैलने से रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं ।

केरल में निपाह वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, मंगलवार को दो लोगों की मौत हो गई है। आशंका है कि ये निपाह वायरस से ग्रस्त थे। इन दो लोगों के सेंपल अभी जांच के लिए भेजे गए हैं। इससे पहले मलप्पुरम और कोझिकोड में इस वायरस के कारण अब तक 10 लोगों की मौत हो गई है, पुणे की वायरोलॉजी लैब की जांच के बाद 18 लोगों में से 12 लोगों में इस वायरस की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें 10 की मौत हो गई है और दो लोगों का अभी इलाज चल रहा है।

इस सबके बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने केरल में निपाह वायरस संक्रमण स्थिति की समीक्षा की है। उन्होंने केरल की स्वास्थ्य मंत्री के.के. शैलजा से बातचीत की और राज्य सरकार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इस बीच राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के निदेशक के नेतृत्‍व में एक दल घटनास्थल पर पहुंच गया है। इस दल ने वहां से न सिर्फ सेंपल जुटाये बल्कि इलाज की स्थिति की भी समीक्षा की है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लोगों से सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे अफवाहों पर ध्यान न देने और दहशत न फैलाने की अफील की है। केरल के हालात को देखते हुए तमिलनाडु के सीमावर्ती इलाकों में भी सतर्कता बरती जा रही है तो वहीं महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि राज्य में निपाह को देखते हुए पूरी सावधानी बरती जा रही है। केरल के कोझिकोड और मलप्पुरम में फैल रही इस बीमारी के बाद तमिलनाडु सरकार ने भी सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ा दी है। निपाह वाइरस पशुओं से मनुष्य में फैलता है। इससे पशु और मनुष्य दोनों गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं।

इस वाइरस के स्वाभाविक वाहक फ्रूट बैट यानी चमगादड़ हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक़ निपाह वायरस (NiV) तेज़ी से उभरता वायरस है, जो जानवरों और इंसानों में गंभीर बीमारी को जन्म देता है। NiV के बारे में सबसे पहले 1998 में मलेशिया के कम्पंग सुंगाई निपाह से पता चला था।

वहीं से इस वायरस को ये नाम मिला। उस वक़्त इस बीमारी के वाहक सूअर बनते थे। फिर 2004 में बांग्लादेश में कुछ लोग इस वायरस की चपेट में आए। उस वक्त चमगादड़ों ने खजूर के फलों में इस वाइरस को फैला दिया था। जिन लोगों ने खजूर खाया वो इसके शिकार हो गए। अब ये वायरस मुख्य रूप से प्रभावित चमगादड़, सूअर और इंसानों के जरिये फ़ैल रहा है।

निपाह वाइरस के लक्षण

इस खतरनाक वाइरस के फैलने की शुरुआत दिमाग से होती है। पीड़ित व्यक्ति का दिमाग सूजने लगता है और वो बुखार की चपेट में आ जाता है। इसके साथ ही चक्कर आना और दिमाग ठीक से काम नहीं करना आम बात है। इन लक्षणों का इलाज समय पर नहीं करने पर पीड़ित 24 से 48 घंटों में कोमा में जा सकता है। पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने समेत कई तरह की अंदरूनी प्रक्रिया में दिक्कत हो सकती है। सेंटर फ़ॉर डिसीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक निपाह वायरस का इंफ़ेक्शन एंसेफ़्लाइटिस यानी दिमागी बुखार से जुड़ा है।

इलाज क्या है ?

निपाह वायरस का फिलहाल कोई इलाज नहीं है। इसलिए इसके शुरूआती लक्षणों को रोका जाना जरूरी है। यानी रोकथाम और सावधानी बरतना ही इसका सही इलाज हो सकता है। जरुरत इस बात की भी है कि इस वायरस से जुड़ी जानकारी आसपास के लोगों के साथ साझा करें। ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसके बारे में अवगत कराएं। सूअरों और चमगादड़ों से संपर्क में न आएं। पीड़ित व्यक्ति से भी दूर रहे। यदि आप ऐसे पीड़ित के पास जाते हैं, तो उससे बराबर दूरी बनाए रखें। यानी सावधानी ही बचाव है।