मणिपुर में पहली बार खिला कमल

उत्तर-पूर्व के राज्य मणिपुर में इतिहास बनाते हुए बुधवार को पहली बार भाजपा गठबंधन की सरकार का गठन हो गया। भाजपा विधायक एन बीरेन सिंह को राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। एन बीरेन सिंह के साथ एनपीपी के वाई जॉय कुमार को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई।

पहले असम, फिर अरुणाचल प्रदेश और अब मणिपुर। एन बीरेन सिंह के मणिपुर के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही पूर्वोत्तर के तीसरे राज्य में कमल खिल गया है। एन बीरेन सिंह के इस शपथ-ग्रहण के साथ ही वो राज्य में बीजेपी की पहली सरकार के सीएम बन गए हैं। राज्यपाल नज़मा हेप्तुल्ला ने बीरेन सिंह को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। एनपीपी के वाई जॉयकुमार ने उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।

इसके अलावा सात और मंत्रियों ने भी शपथ ली है। इनमें एक बीजेपी, तीन एनपीपी, एक एनपीएफ, एक एलजेपी और एक कांग्रेस के बागी विधायक हैं। इस समारोह में हिस्सा लेने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी पहुंचने वाले थे, लेकिन विमान में तकनीकी ख़राबी की वजह से वो नहीं पहुंच सके।

56 साल के बीरेन सिंह 2007 से 2016 तक कांग्रेस में रहे। पिछले साल इबोबी सिंह की सरकार में कैबिनेट में फेरबदल की मांग को लेकर उन्होंने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थामा। वो राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं। इसके अलावा एक स्थानीय अख़बार के संपादक रहने के साथ कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। 60 में से 21 सीटें जीतने वाली बीजेपी ने मणिपुर में एनपीएफ, एनपीपी, टीएमसी और एलजेपी के सहयोग से सरकार बनाई है। पार्टी ने 33 विधायकों के समर्थन का दावा किया है।

दरअसल विरोधी बीजेपी पर पहले केवल उत्तर भारत की पार्टी होने का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन पहले दक्षिण के कर्नाटक और फिर उत्तर पूर्व में कमल खिलाकर पार्टी ने इन आरोपों को नकार दिया है। पूर्वोत्तर में असम के विधानसभा चुनावों में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी और सर्वानंद सोनोवाल राज्य के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल में हुई राजनीतिक उठापटक के बाद आखिरकार बीजेपी की सरकार बनी, और अब मणिपुर में भी 15 साल के कांग्रेस शासन का खात्मा करते हुए बीजेपी ने वहां कमल खिलाया है।

पूर्वोत्तर के विकास को केंद्र सरकार भी अपनी प्राथमिकता बताती रही है। खुद पीएम मोदी कह चुके हैं कि पूर्वोत्तर के विकास के बिना देश का विकास अधूरा है। पिछले ढाई साल से ज्यादा के कार्यकाल में मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर के लिए कई विकास योजनाएं शुरू की हैं। सड़क, रेल जैसी बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर देने के साथ ही केंद्र सरकार इन राज्यों में शांति के लिए भी तमाम कोशिशें कर रही हैं।

मणिपुर में 15 साल के इबोबी सिंह सरकार में विकास की गति ठप होने और व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लगते रहे हैं। नई सरकार के सामने अपने कामकाज में पारदर्शिता बरतते हुए राज्य में विकास की गति तेज करने की अहम चुनौती होगी। अस्थिरता के लिए मशहूर राज्य में लंबे समय तक एक स्थिर सरकार मुहैया कराना भी उनके सामने एक बड़ी चुनौती है।