डेथ गेम ब्लू व्हेल : दिल्ली में मासूम ने काटी नस, मां ने देखा तो बच गई जान

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द्वारका इलाके में शनिवार आधी रात को एक 17 साल का स्टूडेंट जख्मी हालत में मिला, स्टूडेंट को अस्पताल में भर्ती कराया है। आधी रात को ब्लू व्हेल गेम खेलते हुए घर से निकल गया था। दूसरी बार जब स्टूडेंट की काउंसलिंग की गई, तब उसने कबूल किया कि ब्लू व्हेल गेम खेलकर उसने खुद को जख्मी कर लिया था। लड़के की काउंसलिंग की जा रही है।

दरअसल आपको बता दें कि 11वीं क्लास का स्टूडेंट गेम खेलते हुए आधी रात को घर से निकल आया था, और अपने साथ वो खुद को जख्मी करने के लिए जमेट्री बॉक्स भी लेकर आया था। लड़के ने अपने हाथ और चेहरे को बुरी तरह काट लिया था। अस्पताल में लड़के ने कबूल किया कि उसने मोबाइल में ब्लू व्हेल गेम डाउनलोड की थी, उसे गेम में खुद को जख्मी करने का टास्क मिला था, इसलिए वो आधी रात को घर से निकल गया था।

स्टूडेंट की मां ने बताया कि उसने बेटे के शरीर पर कई निशान देखे थे, उन्हें शक हो रहा था कि वो कुछ गलत कर रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने से उनका बेटा परिवार में किसी से भी बात नहीं कर रहा था, वो कभी देर रात तो कभी-कभी सुबह बहुत जल्दी उठ जाता था। और मोबाइल में वीडियो देखता रहता था, हालांकि पहली बार लड़के ने कुछ भी बताने से मना किया।

द्वारका अस्पताल के डॉक्टर भगवत राजपूत जो लड़के का इलाज कर रहे है, उनसे भी लड़के ने कुछ भी बताने से मना किया, लेकिन जब दूसरी बार उसकी काउंसलिंग की गई तो उसने बताया कि वो ब्लू व्हेल गेम खेल रहा था। और उसने अपने दोस्तों से खुद को बहादुर साबित करने के लिए चैंलेज एक्सेपट किया था।

डॉक्टर राजपूत ने बताया कि लड़के के चेहरे और हाथ पर निशान के बाद से उसके व्यवहार में बदलाव आ गया था, और वो लगातार गेम खेल रहा था, और सारे टास्क भी पूरे कर रह था, हालांकि गेम में अभी बहुत सारे टास्क पूरे करने बाकी थे। हालांकि लड़के ने किसी दबाव में होने से इन्कार किया।

बता दें कि जितने भी प्लेयर इस गेम का शिकार होने की वजह से अस्पताल में भर्ती हैं, सबका कहना है कि गेम में जाने के बाद बाहर निकलना मुमकिन नहीं है,क्योंकि गेम का एडमिन आपका सारा पर्सनल डाटा ले लेता है और ब्लैकमेल करता है। इसलिए चाहकर भी कोई गेम से बाहर नहीं निकल पाता। देश में ब्लू व्हेल का शिकार सबसे ज्यादा दिल्ली के बच्चे हो रहे हैं।

इस गेम से बचने का तरीका सिर्फ इसको ना खेलना ही है। खेलने के बाद प्लेयर की जिंदगी बचने की उम्मीदे ना के बराबर ही हैं। मां-बाप को बच्चे की हर सोशल एक्टिविटी पर नजर रखनी चाहिए। बच्चे के व्यवहार में जरा भी फर्क लगने पर तुरंत उसकी काउंसलिंग करानी चाहिए।