गर्भकालीन मधुमेह: कारण, लक्षण, बचाव और सावधानियां

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गर्भकालीन मधुमेह: कारण, लक्षण, बचाव और सावधानियांगर्भकालीन मधुमेह: कारण, लक्षण, बचाव और सावधानियां
मधुमेह रोग का प्रभाव शरीर के सभी अंगों पर पड़ता है और यदि मधुमेह रोग महिला में हो और खासतौर पर गर्भावस्था के दौरान हो तो इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।

मधुमेह रोग स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है। इसके विषय में जागरूकता की आवश्यकता है। हर गर्भवती महिला को गर्भधारण के छठे महीने में मधुमेह की जांच ज़रूर करवानी चाहिए। मधुमेह का अधिक खतरा होने पर यह जांच गर्भधारण होते ही करवानी चाहिए।

गर्भावस्था में मधुमेह: खतरे के कारक

  • मधुमेह का पारिवारिक इतिहास
  • मोटापा
  • बार- बार गर्भपात होना

गर्भावस्था में मधुमेह : सावधानी

  • गर्भावस्था के चौथे महीने में अल्ट्रासाउंड करवाना ज़रूरी
  • अल्ट्रासाउंड से गर्भस्थ शिशु में विकृति की पहचान संभव
  • गर्भस्थ शिशु में सिर, रीढ़ की हड्डी और हृदय में विकृति का खतरा

गर्भावस्था में मधुमेह : प्रबंधन

  • मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है
  • आहार में बदलाव ज़रूरी
  • आवश्यकता पड़ने पर दवाएं दी जाती हैं
  • कुछ मामलों में इन्सुलिन की आवश्यकता होती है

गर्भावस्था में मधुमेह पर नियंत्रण : लाभ

  • गर्भस्थ शिशु का स्वस्थ विकास सुनिश्चित हो जाता है
  • गर्भावस्था के दौरान महिला के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव
  •  प्रसव सामान्य रूप से संभव हो पाता है

जेस्टेशनल डायबिटीज यानि गर्भावस्था में मधुमेह होने पर यदि रक्त में शर्करा का स्तर नियंत्रित न रहे तो मां और शिशु दोनों के लिए समस्या उत्पन्न हो सकती है।

गर्भावस्था में मधुमेह : प्रसव के बाद सावधानियां

  • प्रसव के बाद महिला को मधुमेह रोग (टाइप-२) होने की संभावना ज्यादा
  • मधुमेह रोग से बचाव के लिए ब्लड शुगर की नियमित जांच कराएं मधुमेह रोग से बचाव
  •  स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं
  • संतुलित आहार लें
  • आहार में वसा की मात्रा अधिक न हो
  • नियमित व्यायाम करें
  • सैर के लिए जाएं
  • तनाव कम करने के उपाय करें

योग व प्राणायाम मधुमेह के ख़तरे को पहचानें और मधुमेह से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।